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BPSC TRE 4.0
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भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चार्ल्स वुड का शिक्षा पर प्रेषित घोषणा-पत्र (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा' कहा जाता है, ने जन-साधारण की शिक्षा के उत्तरदायित्व को कंपनी सरकार का मुख्य कर्तव्य माना और प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा तथा उच्च शिक्षा के स्तर पर अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग की सिफारिश की थी।
  2. 2. लॉर्ड मैकाले के मिनट (1835) और आंग्ल-प्राच्य विवाद (Anglican-Orientalist Controversy) के पश्चात विलियम बेंटिंक की सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पारित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य यूरोपीय साहित्य और विज्ञान का प्रसार तथा पाश्चात्य शिक्षा के माध्यम से प्रशासन के लिए लिपिक तैयार करना था।
  3. 3. हंटर शिक्षा आयोग (1882) का मुख्य गठन प्राथमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करना था, और इस आयोग ने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण पूरी तरह से केंद्रीय सरकार को सौंपने की जोरदार वकालत की थी, जिससे स्थानीय निकायों की भूमिका समाप्त हो जाए।
  4. 4. सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917-19) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जांच के साथ-साथ स्कूली शिक्षा की अवधि 12 वर्ष करने की सिफारिश की थी, और साथ ही यह भी सुझाव दिया था कि माध्यमिक और इंटरमीडिएट शिक्षा का नियंत्रण विश्वविद्यालयों के नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। चार्ल्स वुड का घोषणा-पत्र (1854) भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा कहलाता है, जिसने प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा और उच्च शिक्षा में अंग्रेजी की वकालत की। मैकाले मिनट (1835) ने पाश्चात्य शिक्षा और अंग्रेजी को बढ़ावा दिया। सैडलर आयोग (1917-19) ने स्कूली शिक्षा 12 वर्ष करने और इंटरमीडिएट शिक्षा को विश्वविद्यालयों से अलग करने की सिफारिश की थी। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि हंटर आयोग (1882) ने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण जिला और नगरपालिका बोर्डों जैसे स्थानीय निकायों को सौंपने की सिफारिश की थी, न कि केंद्रीय सरकार को। अधिक अभ्यास और परीक्षा सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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