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BPSC TRE 4.0
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राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं रक्षा समसामयिक घटनागामी संदर्भों के तहत, हाल ही में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित 'अग्नि-Prime' (Agni-P) बैलिस्टिक मिसाइल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'अग्नि-Prime' एक मध्यम दूरी की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है, जो कनस्तर-बंद (Canisterised) प्रणाली पर आधारित है और इसे सड़क तथा रेल दोनों माध्यमों से आसानी से मोबाइल लॉन्चर के जरिए दागा जा सकता है।
- 2. इस मिसाइल में उन्नत सॉलिड प्रोपेलेंट (ठोस ईंधन) रॉकेट मोटर्स और अत्याधुनिक नेविगेशन एवं मार्गदर्शन प्रणालियों का उपयोग किया गया है, जो इसकी मारक क्षमता को अत्यधिक सटीक बनाते हैं।
- 3. यह मिसाइल मल्टी-इन्डिपेन्डेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से सुसज्जित है, जिसके कारण यह एक ही उड़ान में अलग-अलग दिशाओं में स्थित कई लक्ष्यों को एक साथ भेदने में पूरी तरह सक्षम है।
- 4. अग्नि-Prime का विकास भारत की त्रि-सेवा (Tri-Service) रणनीतिक ताकतों के आधुनिकीकरण के तहत किया गया है और इसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के दायरे में आती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (a) है। कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। 'अग्नि-Prime' एक नई पीढ़ी की उन्नत मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है जो कनस्तर-बंद तकनीक पर आधारित है, जिससे इसके भंडारण और परिवहन में आसानी होती है। यह ठोस ईंधन पर चलती है और इसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किमी के बीच है। हालांकि, MIRV तकनीक मुख्य रूप से 'अग्नि-5' जैसी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों के उन्नत संस्करणों से जुड़ी है, न कि अग्नि-P की प्राथमिक विशेषताओं में इसे इस रूप में वर्गीकृत किया गया है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के विज्ञान और समसामयिक खंड के लिए इस तरह के रक्षा मामलों के प्रश्न अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपदों के उदय और मौर्य एवं गुप्त काल की प्रशासनिक व आर्थिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगूत्तर निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध और जैन ग्रंथ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें 'वज्जी संघ' विश्व के सबसे प्राचीन गणराज्यों (Republics) में से एक माना जाता है, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
2. मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक (Superintendents) होते थे, तथा कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार कृषि विभाग के प्रमुख को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था, जो राजकीय भूमि (सीता भूमि) की कृषि का प्रबंधन करता था।
3. गुप्तकाल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 भाग हुआ करती थी, और इस काल में भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य के सामंतवादी व्यवस्था (Feudalism) के लक्षण स्पष्ट रूप से उभरने लगे थे।
4. सातवाहन वंश के शासकों ने सबसे पहले बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की परंपरा शुरू की थी, तथा उनके अभिलेखों में भूमिदान के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारों के हस्तांतरण का भी उल्लेख मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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