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BPSC TRE 4.0
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केंद्रीय बजट और आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) के समसामयिक और राजकोषीय प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वित्तीय वर्ष के केंद्रीय बजट में प्रस्तुत 'राजकोषीय घाटा' (Fiscal Deficit) सरकार की कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में कुल ऋण सृजन की आवश्यकता को इंगित करना है।
- 2. 'प्रभावी राजस्व घाटा' (Effective Revenue Deficit), राजस्व घाटे में से पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए दिए गए अनुदानों को घटाकर निकाला जाता है, जिसे पहली बार वर्ष 2011-12 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था।
- 3. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत सरकार द्वारा 'पूंजीगत व्यय' (Capital Expenditure - Capex) में लगातार की जा रही वृद्धि का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और भीड़भाड़ को कम करके रसद (Logistics) लागत को घटाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। केंद्रीय बजट और आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधारी आवश्यकताओं को दर्शाता है। प्रभावी राजस्व घाटा, राजस्व घाटे में पूंजीगत परिसंपत्ति अनुदानों को समायोजित करके निकाला जाता है ताकि यह पता चल सके कि राजस्व घाटे का कितना हिस्सा वास्तविक उपभोग व्यय के लिए है। इसके अलावा, भारत सरकार दीर्घकालिक संवृद्धि के लिए कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। ऐसी और महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों, महाजनपदों, दार्शनिक प्रणालियों तथा साहित्यिक स्रोतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर वैदिक काल में प्रयुक्त 'शतमान' (Shatamana) और 'निष्का' (Nishka) प्रारंभिक भारतीय इतिहास में विनिमय के साधन या माप के रूप में प्रयुक्त होने वाली धातु की मुद्राएँ या इकाइयाँ थीं, जिनका उल्लेख ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों में मिलता है।
2. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में से 'वज्जी' (Vajjian Confederacy) एक राजतंत्रात्मक प्रणाली पर आधारित महाजनपद था, जिसकी राजधानी वैशाली थी और यह बुद्धकालीन समय का सबसे शक्तिशाली राजतंत्र था।
3. जैन दर्शन के अनुसार, 'स्याद्वाद' (Syadvada) या 'सप्तभंगी नय' का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और प्रत्येक वस्तु के अनेक पहलू (अनेककांतवाद) होते हैं, जिसे पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता।
4. संगम साहित्य के अंतर्गत रचित 'तोलकाप्पियम' (Tolkappiyam) तमिल व्याकरण और काव्यशास्त्र का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसकी रचना तोलकाप्पियार द्वारा की गई थी और यह प्राचीन दक्षिण भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का विस्तृत विवरण देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ध्वनि की गति सर्वाधिक किसमें होती है?
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अचार या भोजन के परिरक्षण (Preservation) के लिए किसका उपयोग होता है?
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असहयोग आंदोलन (1920-22) और उसके स्थगन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव की पुष्टि की गई तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन कर 'शांतिपूर्ण और वैध साधनों' द्वारा 'स्वराज्य' प्राप्ति के लक्ष्य को स्वीकार किया गया।
2. आंदोलन के दौरान बिहार में स्वामी विद्यानंद ने किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया, जबकि चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने न्यायालयों का बहिष्कार करते हुए अपनी वकालत छोड़ दी थी।
3. 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी-चोरा नामक स्थान पर हुई हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने बारदौली में कांग्रेस की बैठक बुलाकर असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी थी।
4. आंदोलन के स्थगन के निर्णय से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की, जिसके प्रथम अध्यक्ष चित्तरंजन दास और प्रथम सचिव मोतीलाल नेहरू बने थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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