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BPSC TRE 4.0
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प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect), एक्स-किरणों के उत्पादन और रेडियोधर्मिता से जुड़े भौतिकी के विविध आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आइंस्टीन के प्रकाश वैद्युत समीकरण के अनुसार, उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित फोटॉन की आवृत्ति पर रैखिक रूप से निर्भर करती है, और देहली आवृत्ति (Threshold Frequency) से कम आवृत्ति का प्रकाश तीव्रता बढ़ाने पर भी कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं कर सकता है।
  2. 2. 'कूलिज ट्यूब' (Coolidge Tube) में तीव्र गति से चलने वाले इलेक्ट्रॉनों को उच्च परमाणु क्रमांक वाले भारी धातु के लक्ष्य (Target) पर टकराकर एक्स-किरणें उत्पन्न की जाती हैं, जहाँ लक्ष्य धातु का परमाणु क्रमांक जितना अधिक होगा, उत्पन्न होने वाली एक्स-किरणों की वेधन क्षमता (Penetrating Power) उतनी ही कम होगी।
  3. 3. रेडियोधर्मिता के अल्फा ($α$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 इकाई और द्रव्यमान संख्या 4 इकाई कम हो जाती है, जबकि बीटा-माइनस ($β^-$) क्षय के दौरान नाभिक का परमाणु क्रमांक 1 इकाई बढ़ जाता है क्योंकि न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि प्रकाश वैद्युत प्रभाव में उत्सर्जन केवल देहली आवृत्ति से अधिक आवृत्ति पर संभव है और अधिकतम गतिज ऊर्जा आवृत्ति पर निर्भर करती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि कूलिज ट्यूब में लक्ष्य धातु का परमाणु क्रमांक जितना अधिक होता है, उत्पन्न एक्स-किरणों की तीव्रता और उनकी वेधन क्षमता (विशेषकर अभिलक्षणिक एक्स-किरणों की ऊर्जा) उतनी ही अधिक होती है, कम नहीं। कथन 3 पूर्णतः सत्य है क्योंकि अल्फा क्षय में परमाणु क्रमांक 2 और द्रव्यमान 4 कम होता है, तथा बीटा-माइनस क्षय में न्यूट्रॉन के प्रोटॉन में बदलने के कारण परमाणु क्रमांक 1 इकाई बढ़ जाता है। अधिक अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पोर्टल पर जा सकते हैं।
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