BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
10 views

संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए किस प्रकार के बहुमत की आवश्यकता होती है?

Detailed Explanation

संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत (अनुच्छेद 368) अनिवार्य है।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण अधिकार तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार राज्यपाल को उस विषय पर, जिससे संबंधित राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल किसी भी स्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, भले ही वह मामला राज्य सूची के किसी कानून के उल्लंघन से ही संबंधित क्यों न हो, क्योंकि मृत्युदंड के मामले में क्षमादान की अनन्य शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनरुद्धार होने पर छह सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल के दोनों सदन (जहाँ द्विसदनीय व्यवस्था है) अलग-अलग तिथियों पर पुनः समवेत होते हैं, तो छह सप्ताह की यह अवधि उस तिथि से गिनी जाएगी जिस तिथि को बाद वाला सदन अपनी बैठक प्रारंभ करता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई राज्य के प्रशासन और विधान से संबंधित सभी जानकारी प्रदान करे, किंतु राज्यपाल अपनी इच्छा से मंत्रिपरिषद के किसी भी निर्णय को पुनर्विचार के लिए सीधे वापस नहीं भेज सकता जब तक कि मुख्यमंत्री स्वयं ऐसा अनुरोध न करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-A के अनुच्छेद 51A में जोड़ा गया था, और मूल रूप से संविधान में 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे। 2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य माता-पिता या संरक्षक का होगा। 3. ये मूल कर्तव्य न केवल भारत के नागरिकों पर लागू होते हैं, बल्कि भारतीय क्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों (Foreigners) पर भी वैधानिक रूप से समान रूप से बाध्यकारी होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - Article 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत जोड़ी गई 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' की व्यवस्था और अनुच्छेद 43A के तहत 'उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी' का उपबंध मूल संविधान में निहित थे, जिन्हें बाद में 44वें संविधान संशोधन द्वारा संशोधित किया गया। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'चाम्पाकम दोरैराजन बनाम मद्रास राज्य (1951)' मामले में यह निर्धारित किया था कि नीति निर्देशक तत्व मूल अधिकारों के अधीनस्थ हैं और किसी भी संघर्ष की स्थिति में मूल अधिकार ही प्रभावी होंगे, किंतु बाद के न्यायिक निर्णयों (विशेषकर केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स वाद) में यह स्पष्ट किया गया कि संविधान की मूल आत्मा इन दोनों के बीच सामंजस्य और संतुलन पर टिकी है। 3. संविधान के अनुच्छेद 45 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संशोधन करके 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बचपन देखरेख और शिक्षा (ECCV/ECE)' का उपबंध अंतःस्थापित किया गया, जबकि मूल रूप से इस अनुच्छेद में चौदह वर्ष की आयु तक के बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों को उनके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वे राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य या अध्यक्ष हों, और हटाने का आधार कदाचार (Misbehavior) होने पर उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य होती है। 2. अनुच्छेद 318 के अंतर्गत राष्ट्रपति को संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों के नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, जबकि राज्यपाल को अपने राज्य के लोक सेवा आयोग के संदर्भ में ऐसे नियम बनाने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। 3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्य अपनी पदावधि समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने का पात्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के राष्ट्रपति की विधाई, कार्यकारी और विशेष शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 85 के खंड (1) के अनुसार राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर जो वह ठीक समझे, सत्र के लिए आहूत करता है, किंतु यह अनिवार्य है कि संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए, और राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति भी इसी अनुच्छेद के तहत प्राप्त है। 2. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत प्रदत्त अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति स्वविवेक की शक्ति (Discretionary Power) है, जिसका अर्थ यह है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी राष्ट्रीय हित में किसी भी समय अध्यादेश जारी कर सकते हैं, और इस अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती है। 3. राष्ट्रपति को किसी भी ऐसे व्यक्ति को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है जिसे किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दंडित किया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान की शक्ति केवल और केवल राज्यपाल के पास होती है, राष्ट्रपति के पास नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.