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Indian Polity
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भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के तहत होती है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 75 के अंतर्गत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के उपरांत, राज्यों को पंचायती राज व्यवस्था के संबंध में कई विधायी अधिकार दिए गए हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत राज्यों को यह शक्ति दी गई है कि वे पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकें जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से सभी विषयों पर विधि निर्माण का अधिकार अनिवार्य रूप से राज्य सरकारों को सौंपना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है। 2. अनुच्छेद 243-H के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, किसी पंचायत को उसके द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस के आरोपण और संग्रहण के लिए अधिकृत कर सकता है, तथा राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) देने का प्रावधान भी कर सकता है। 3. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को उन सिद्धांतों के बारे में संस्तुति करेगा जो पंचायतों और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण को विनियमित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (भाग-I, अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे', संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जो कि उन विदेशी भू-भागों पर लागू होता है जो पहले से भारत का हिस्सा नहीं थे। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने संबंधी कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक संसद में भेजने से पहले संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजना अनिवार्य होता है और राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई सिफारिश या राय को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है। 3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों का प्रवेश, गठन, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानूनों को संसद द्वारा साधारण बहुमत (सामान्य विधायी प्रक्रिया) से पारित किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति, रिट अधिकारिता तथा अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्राधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक मामलों तक सीमित है तथा इसके अंतर्गत न्यायिक समीक्षा या अपीलिया पुनरीक्षण का अधिकार शामिल नहीं है। 2. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिला न्यायालयों और उनसे भिन्न अन्य न्यायालयों) की पोस्टिंग, प्रमोशन और उनके नियंत्रण से संबंधित संपूर्ण प्रशासनिक अधिकार संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होते हैं। 3. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता के संदर्भ में, उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी 'अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है, जिससे उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का दायरा उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता से अधिक व्यापक हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संसद की बैठक की कोरम? भारत के राष्ट्रपति की विधाई, कार्यकारी और विशेष शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 85 के खंड (1) के अनुसार राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर जो वह ठीक समझे, सत्र के लिए आहूत करता है, किंतु यह अनिवार्य है कि संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए, और राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति भी इसी अनुच्छेद के तहत प्राप्त है। 2. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत प्रदत्त अध्यादेश प्रख्यापित करने की राष्ट्रपति की शक्ति स्वविवेक की शक्ति (Discretionary Power) है, जिसका अर्थ यह है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी राष्ट्रीय हित में किसी भी समय अध्यादेश जारी कर सकते हैं, और इस अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती है। 3. राष्ट्रपति को किसी भी ऐसे व्यक्ति को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है जिसे किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दंडित किया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान की शक्ति केवल और केवल राज्यपाल के पास होती है, राष्ट्रपति के पास नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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