BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
4 views

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की तरह व्यवहार करती हैं और ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं, तरल या गैसीय माध्यम में इनका संचरण असंभव होता है।
  2. 2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो प्रकाश तरंगों की तरह होती हैं और इनकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं, तरल या अर्ध-तरल माध्यम (जैसे बाहरी कोर) में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं।
  3. 3. 'धरातलीय तरंगें' (L-waves) या सतही तरंगें भूकंप के केंद्र (Epicentre) पर धरातल के संपर्क में चलने वाली अंतिम तरंगें होती हैं, जो पृथ्वी की सतह के साथ-साथ चलती हैं और सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं और ये ध्वनि तरंगों की तरह व्यवहार करती हैं, लेकिन ये ठोस, तरल और गैस— तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं। हालांकि, तरल माध्यम से गुजरते समय इनकी गति धीमी हो जाती है। कथन 2 सही है: द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं। इनकी एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं और तरल या अर्ध-तरल माध्यम (जैसे पृथ्वी का बाहरी क्रोड या Outer Core) में प्रवेश करते ही विलुप्त हो जाती हैं। S-waves के इसी गुण के कारण वैज्ञानिकों को यह पता चला कि पृथ्वी का बाहरी क्रोड तरल अवस्था में है। कथन 3 सही है: धरातलीय तरंगें (L-waves या Surface Waves) उद्गम केंद्र (Focus) से ऊर्जा के धरातल पर पहुँचने के बाद उत्पन्न होती हैं और ये पृथ्वी की सतह के साथ चलती हैं। ये सबसे लंबी दूरी तय करती हैं और अत्यधिक विनाशकारी होती हैं।
Share:

Related Questions

किस एक्ट ने ईस्ट इंडिया कंपनी के चाय और चीन के साथ व्यापारिक एकाधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति' (Appointment of Supreme Court Judges) और 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) के ऐतिहासिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. द्वितीय न्यायाधीश मामला (Second Judges Case, 1993) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि 'परामर्श' (Consultation) का अर्थ 'सहमति' (Concurrence) होता है, और मुख्य न्यायाधीश की यह सिफारिश अंतिम होगी यदि इसमें सर्वोच्च न्यायालय के दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों की संस्तुति भी शामिल हो। 2. तृतीय न्यायाधीश मामला (Third Judges Case, 1998) में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति के परामर्श के दायरे को विस्तारित करते हुए यह स्पष्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश द्वारा कॉलेजियम के परामर्श में सर्वोच्च न्यायालय के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों (four senior-most judges) की बहुसंख्यक राय को शामिल करना अनिवार्य है, अन्यथा भेजी गई सिफारिश सरकार पर बाध्यकारी नहीं होगी। 3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 और उससे संबंधित संविधान (निन्यानवे वां संशोधन) अधिनियम, 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015)' मामले में इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary) का उल्लंघन करता है, जो कि संविधान के बुनियादी ढांचे (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India - AG) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और वह व्यक्ति इस पद पर नियुक्त होने के लिए अर्ह होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए योग्य हो, अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में एक प्रख्यात विधिवेत्ता हो। 2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार भी है, किंतु उसे संसद में किसी भी प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। 3. महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और वह एक पूर्णकालिक (Full-time) सरकारी कर्मचारी होता है, जिसके लिए यह सांविधिक रूप से अनिवार्य किया गया है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी निजी मुकदमे या प्रैक्टिस में वकालत नहीं कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) तथा ऊपरी वायुमंडल के परिसंचरण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जेट स्ट्रीम्स क्षोभमंडल (Troposphere) की ऊपरी परतों में अत्यधिक तीव्र गति से बहने वाली संकीर्ण पट्टियाँ हैं, जिनकी सामान्य दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर होती है, और ये मुख्य रूप से ध्रुवीय मोर्चों (Polar Fronts) तथा तापमान के तीव्र अंतरालों (Thermal Gradients) के कारण उत्पन्न होती हैं। 2. भारतीय मानसून तंत्र के संदर्भ में, 'उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream - TEJ) ग्रीष्म ऋतु के दौरान तिब्बत के पठार के गर्म होने से उत्पन्न होती है, जो प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 3. उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Westerly Jet Stream) सर्दियों के दौरान हिमालय पर्वत श्रृंखला के उत्तर में प्रवाहित होती है और इसका भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि हिमालय इसे पूरी तरह से रोक लेता है और यह निचले क्षोभमंडल तक कभी नहीं पहुँचती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? सुमेलित कीजिए: A-2 (विक्रमशिला-बिहार), B-1 (निजामुद्दीन औलिया दरगाह-दिल्ली), C-3 (चारमीनार-हैदराबाद), D-4 (फतेहपुर सीकरी-अकबर द्वारा)।
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.