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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणता' (Ocean Salinity) और इसे प्रभावित करने वाले कारकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय जल में घुले हुए लवणों की मात्रा को प्रति हजार ग्राम जल में विलीन लवण की ग्राम मात्रा (Parts Per Thousand - ppt) में व्यक्त किया जाता है, जिसमें सोडियम क्लोराइड (NaCl) की मात्रा सर्वाधिक होती है।
  2. 2. भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों (Poles) की ओर बढ़ने पर सामान्यतः महासागरीय लवणता में निरंतर कमी आती जाती है, क्योंकि उच्च अक्षांशों पर वाष्पीकरण की दर बहुत अधिक होती है और नदियाँ बड़े पैमाने पर मीठा जल जोड़ती हैं।
  3. 3. लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) जैसे अर्ध-बंद समुद्रों (Semi-enclosed Seas) में उच्च तापमान के कारण तीव्र वाष्पीकरण होता है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ की लवणता विश्व के खुले महासागरों के औसत मान से काफी अधिक पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: महासागरीय लवणता को प्रति हजार (ppt - parts per thousand) में मापा जाता है। महासागरों में घुले कुल लवणों में सोडियम क्लोराइड का योगदान सबसे अधिक (लगभग 77.8%) होता है। कथन 2 गलत है: भूमध्य रेखा पर अत्यधिक वर्षा और बादलों के कारण लवणता बहुत अधिक नहीं होती, बल्कि सबसे अधिक लवणता उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्रों (लगभग 20° से 40° अक्षांश) में पाई जाती है जहाँ वाष्पीकरण अधिक होता है। ध्रुवों की ओर जाने पर लवणता कम अवश्य होती है, किंतु इसका कारण उच्च वाष्पीकरण नहीं बल्कि बर्फ का पिघलना और कम वाष्पीकरण है। कथन 3 सही है: लाल सागर और फारस की खाड़ी जैसे उष्णकटिबंधीय अर्ध-बंद समुद्रों में उच्च तापमान के कारण वाष्पीकरण अत्यधिक होता है और मीठे जल की आवक कम होती है, जिससे वहाँ लवणता बहुत अधिक (लगभग 40 ppt या उससे अधिक) होती है।
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