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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के बीच विधाई संबंध' (Legislative Relations - अनुच्छेद 245 से 255) तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residual Powers) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में शामिल नहीं है, और इस 'अवशिष्ट शक्ति' (Residual Power) के अंतर्गत कर लगाने (Taxation) की शक्ति भी संसद में ही निहित है।
  2. 2. यद्यपि भारत का संविधान कनाडा के संविधान से प्रेरित होकर संघ को अवशिष्ट शक्तियाँ प्रदान करता है, किंतु ऑस्ट्रेलिया के संविधान के विपरीत, भारतीय संविधान में राज्य सूची के विषयों पर भी संसद को राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की शक्ति प्रदान की गई है यदि राज्यसभा अपनी कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से ऐसा संकल्प पारित कर दे।
  3. 3. समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर यदि संसद द्वारा बनाई गई विधि और राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधि में कोई विरोधाभास (Repugnancy) उत्पन्न होता है, तो संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार संसद की विधि हमेशा प्रभावी होगी और राज्य की विधि उस सीमा तक शून्य होगी, भले ही राज्य की विधि को राष्ट्रपति की अनुमति बाद में प्राप्त हुई हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य (Exclusive) शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में प्रगणित नहीं है। इसमें कर लगाने (Taxation) की अवशिष्ट शक्ति भी शामिल है, जो अमेरिकी या ऑस्ट्रेलियाई संघों से भिन्न है जहाँ यह राज्यों के पास होती है। कथन 2 सही है: भारत ने कनाडा की तरह संघ को अवशिष्ट शक्तियाँ दी हैं। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद उस पर कानून बना सकती है। यह एकात्मक झुकाव को दर्शाता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर संसद और राज्य विधानमंडल के कानून में टकराव होता है, तो संसद का कानून सामान्यतः प्रभावी होता है। किंतु, यदि राज्य का कानून उस विषय पर राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखा गया था और उसे राष्ट्रपति की अनुमति (Assent) मिल जाती है, तो वह राज्य का कानून उस राज्य में प्रभावी बना रहेगा (भले ही वह संसदीय कानून के विरुद्ध हो)। संसद तब भी उस पर नया कानून बनाकर राज्य के कानून को संशोधित या निरस्त कर सकती है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होने पर राज्य का कानून प्रभावी रहता है।
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