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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1946 में गठित 'अंतरिम सरकार' (Interim Government) तथा उससे जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कैबिनेट मिशन योजना के प्रस्तावों के आधार पर 2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था, जिसमें शुरू में मुस्लिम लीग शामिल नहीं हुई थी, किंतु बाद में वायसराय लॉर्ड वेवल के प्रयासों से अक्टूबर 1946 में मुस्लिम लीग के पाँच सदस्य भी इस सरकार में शामिल हो गए थे और लियाकत अली खान को महत्वपूर्ण 'वित्त विभाग' (Finance Portfolio) सौंपा गया था।
- 2. अंतरिम सरकार में शामिल होने के पश्चात मुस्लिम लीग ने प्रशासनिक सहयोग देने की नीति अपनाई और संविधान सभा की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए भारत के विभाजन की मांग को औपचारिक रूप से त्याग दिया था।
- 3. वायसराय लॉर्ड वेवल द्वारा बुलाई गई अंतरिम सरकार की बैठकों में मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों ने लगातार बाधा उत्पन्न की, जिसके कारण सरकार के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 2 सितंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। शुरुआत में मुस्लिम लीग इसमें शामिल नहीं हुई थी, लेकिन अक्टूबर 1946 में लॉर्ड वेवल के समझाने पर मुस्लिम लीग ने सरकार में प्रवेश किया और लियाकत अली खान को वित्त विभाग (Finance Department) का प्रभार मिला, जिसके माध्यम से उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विभागों के कामकाज को नियंत्रित करने का प्रयास किया था।
कथन 2 गलत है: अंतरिम सरकार में शामिल होने के बाद भी मुस्लिम लीग ने प्रशासनिक सहयोग देने के बजाय 'प्रत्यक्ष कार्रवाई' (Direct Action) की नीति जारी रखी और वे संविधान सभा की बैठकों में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की अलग मांग पर अड़े रहना था।
कथन 3 सही है: अंतरिम सरकार के भीतर मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों ने असहयोग की नीति अपनाई और बैठकों में लगातार बाधा उत्पन्न की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि एक ही मंत्रिमंडल के भीतर रहकर दो विरोधी दल मिलकर सरकार नहीं चला सकते।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित债券' (Green Bonds) और सतत वित्त पोषण (Sustainable Finance) के प्रावधानों तथा वैश्विक मानकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बॉन्ड (Green Bonds) ऐसे निश्चित आय वाले वित्तीय उपकरण (Fixed-income instruments) हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण-हितैषी परियोजनाओं, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए पूंजी जुटाने हेतु किया जाता है।
2. भारत में सार्वभौमिक हरित बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) का ढांचा वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसके तहत जुटाई गई आय को देश की भारत समचित निधि (Consolidated Fund of India) में अन्य सामान्य सरकारी प्राप्तियों के साथ मिला दिया जाता है और अलग से कोई विशेष ट्रैकिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बॉन्ड बाजार की पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए 'ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स' (Green Bond Principles - GBP) का प्रबंधन इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट एसोसिएशन (ICMA) द्वारा किया जाता है, जो उपयोग की आय, परियोजना मूल्यांकन और चयन तथा रिपोर्टिंग के लिए स्वैच्छिक दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी, यह किस अनुच्छेद में वर्णित है?
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दल-बदल विरोधी कानून के लिए कौन सा संविधान संशोधन किया गया था?
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क्या कैबिनेट मिशन ने भारत के विभाजन को स्वीकार किया था?
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मुन्तख़ब-उत-तवारीख़ के लेखक कौन थे?
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