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भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान की 'सातवीं अनुसूची' (Seventh Schedule) के अंतर्गत संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों (Union, State, and Concurrent Lists) तथा विधायी शक्तियों के वितरण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुच्छेद 246 के तहत विधायी विषयों का त्रिविध वितरण किया गया है, जिसमें 'संघ सूची' (List I) में मूल रूप से 97 विषय थे जो वर्तमान में बढ़कर 100 हो गए हैं, 'राज्य सूची' (List II) में मूल रूप से 66 विषय थे जिन्हें घटाकर वर्तमान में 61 कर दिया गया है, और 'समवर्ती सूची' (List III) में मूल रूप से 47 विषय थे जिन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा बढ़ाकर 52 कर दिया गया है।
- 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राज्य सूची के पाँच महत्वपूर्ण विषयों—शिक्षा, वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, नाप-तोल, तथा न्याय का प्रशासन (उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के गठन को छोड़कर)—को समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया था।
- 3. यदि संघ सूची या समवर्ती सूची के किसी विषय पर संसद द्वारा बनाई गई विधि और राज्य सूची के किसी विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधि के बीच कोई असंगति या विरोधाभास उत्पन्न होता है, तो हमेशा राज्य विधानमंडल की विधि को सर्वोच्चता प्राप्त होगी, भले ही वह समवर्ती सूची का मामला क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत विधायी विषयों का विभाजन किया गया है। मूल रूप से संघ सूची में 97 विषय थे (जो अब 100 हैं), राज्य सूची में 66 विषय थे (जो अब घटकर 61 हो गए हैं), और समवर्ती सूची में 47 विषय थे (जिन्हें 42वें संशोधन द्वारा 5 से बढ़ाकर 52 कर दिया गया)।
कथन 2 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से राज्य सूची के पाँच विषयों (शिक्षा, वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, नाप-तोल, तथा न्याय का प्रशासन) को समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया था।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 254 के अनुसार, यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर संसद की विधि और राज्य विधानमंडल की विधि के बीच असंगति होती है, तो 'संसद की विधि' प्रभावी होगी (न कि राज्य की विधि)। इसके अतिरिक्त, समवर्ती सूची के मामलों में संसदीय कानून को प्राथमिकता मिलती है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं और उनके निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए प्राथमिक रूप से निरंतर बहने वाली प्रचलित हवाएं (Prevailing winds), पृथ्वी का घूर्णन (Coriolis force), तथा महासागरीय जल के तापमान और लवणता में भिन्नता के कारण उत्पन्न घनत्व अंतर उत्तरदायी होते हैं।
2. कोरियोलिस बल (Coriolis force) उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराओं को उनकी मूल दिशा से दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और इस बल का प्रभाव विषुवत वृत्त (Equator) पर सबसे अधिक होता है।
3. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी महासागरीय धारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को अत्यधिक ठंडा करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंपीय तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: भू-गर्भिक तरंगें (Body Waves) और पृष्ठीय तरंगें (Surface Waves), जिनमें 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
2. पृथ्वी के क्रोड (Core) के बाह्य भाग से गुजरते समय S-तरंगें लुप्त (Shadow zone) हो जाती हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि पृथ्वी का बाह्य क्रोड तरल (Liquid) अवस्था में है, जबकि P-तरंगों का वेग अचानक कम हो जाता है, जिससे यह पता चलता है कि आंतरिक क्रोड ठोस अवस्था में है।
3. मोहोरॉविकिच असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट (Crust) और मेंटल (Mantle) की सीमा को पृथक करती है, जबकि गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg Discontinuity) मेंटल और बाह्य क्रोड के बीच स्थित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राजा राममोहन राय के प्रयासों से सती प्रथा का अंत किस गवर्नर जनरल के कार्यकाल में हुआ?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - सर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 124 से 147) तथा 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके द्वारा दिए गए किसी आदेश या निर्णय का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद इस आशय का कोई विशेष अधिनियम पारित करे।
2. 'न्यायिक पुनरावलोकन' की संकल्पना का प्रत्यक्ष उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 32 में स्पष्ट रूप से किया गया है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय को संघ या राज्यों के ऐसे किसी भी कानून को शून्य घोषित करने की शक्ति प्राप्त है जो संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन करते हैं।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि 'संविधान की सर्वोच्चता' और 'न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति' दोनों ही भारतीय संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत किए जाने वाले संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से भी समाप्त या छीना नहीं जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, भारत में 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' (Biological Diversity Act, 2002) तथा इसके अंतर्गत स्थापित त्रि-स्तरीय संस्थागत तंत्र के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए त्रि-स्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA), राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB), और स्थानीय स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) का गठन किया जाता है।
2. 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है, और यह संस्था विदेशी नागरिकों, कंपनियों या अनिवासी भारतीय (NRI) व्यक्तियों द्वारा देश के जैविक संसाधनों या उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के उपयोग के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) आवेदन करने से पूर्व अनुमोदन प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है।
3. स्थानीय स्तर पर गठित 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) का मुख्य कार्य देश के सभी स्तरों पर वाणिज्यिक उपयोग के लिए जैविक संसाधनों के संग्रह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार के जैव-संसाधन को देश से बाहर निर्यात करने की अनुमति न देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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