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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, भारत में 'विदेशी मुद्रा भंडार' (Foreign Exchange Reserves) और 'पूंजी खाता परिवर्तनीयता' (Capital Account Convertibility) के प्रावधानों तथा उनके प्रबंधन के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 'भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934' के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है, और इस भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ (FCAs), स्वर्ण (Gold), विशेष आहरण अधिकार (SDRs), और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास आरक्षित स्थिति (Reserve Tranche) शामिल होती हैं।
  2. 2. 'तारापोरे समिति' (Tarapore Committee), जिसने भारत में पूंजी खाता परिवर्तनीयता पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, ने यह संस्तुति की थी कि पूंजी खाता परिवर्तनीयता को पूरी तरह लागू करने से पहले केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए और मुद्रास्फीति को एक निश्चित लक्ष्य सीमा के भीतर नियंत्रित किया जाना चाहिए।
  3. 3. यद्यपि वर्तमान में भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र और अधिकृत डीलरों के माध्यम से पूंजी खाते पर अनेक प्रकार के लेन-देन (जैसे बाहरी वाणिज्यिक उधार या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के लिए उच्च स्तर की परिवर्तनीयता उपलब्ध है, किंतु घरेलू व्यक्तियों (Resident Individuals) के लिए पूंजी खाते के लेन-देन पर 'उदारीकृत प्रेषण योजना' (Liberalised Remittance Scheme - LRS) के तहत कोई मौद्रिक या मात्रात्मक सीमा लागू नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत किया जाता है। इसके चार प्रमुख घटक हैं: विदेशी मुद्रा संपत्तियां (FCAs), स्वर्ण, एसडीआर (SDRs), और आईएमएफ के पास आरक्षित स्थिति (Reserve Tranche Position)। कथन 2 सही है: एस. एस. तारापोरे समिति (Tarapore Committee) ने भारत में पूंजी खाता परिवर्तनीयता (Capital Account Convertibility - CAC) की रूपरेखा तैयार करते समय कुछ पूर्व-शर्तें (Pre-conditions) सुझाई थीं, जिनमें राजकोषीय घाटे में कमी, मुद्रास्फीति का निम्न स्तर और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करना प्रमुख रूप से शामिल था। कथन 3 गलत है: घरेलू व्यक्तियों (Resident Individuals) के लिए पूंजी खाते के लेन-देन पर 'उदारीकृत प्रेषण योजना' (LRS) के तहत मौद्रिक और मात्रात्मक सीमाएँ (जैसे प्रति वित्तीय वर्ष एक निश्चित अमेरिकी डॉलर की सीमा) लागू होती हैं, कोई असीमित छूट नहीं है।
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