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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 79 से 122) के अंतर्गत संसद की विधायी प्रक्रिया और 'धन विधेयक' (Money Bills - अनुच्छेद 110) से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार कोई विधेयक 'धन विधेयक' तभी माना जाएगा जब उसमें केवल करों के अधारोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, भारत की संचित निधि से धन का विनियोग, या उससे संबंधित किसी आकस्मिकता का उपबंध किया गया हो, तथा ऐसा कोई भी विधेयक राज्यसभा में पुनस्थापित नहीं किया जा सकता है।
- 2. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति (Prior Recommendation) से पुनस्थापित किया जा सकता है, और जब लोकसभा द्वारा इसे पारित करके राज्यसभा में भेजा जाता है, तब राज्यसभा के पास यह शक्ति होती है कि वह इस विधेयक में अपनी संस्तुति के साथ संशोधन कर सकती है या इसे अधिकतम 30 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है।
- 3. लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब राज्यसभा को भेजा जाता है और राज्यसभा चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित किया हुआ समझा जाएगा जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, धन विधेयक में केवल विशिष्ट वित्तीय मामले (जैसे कर, ऋण, संचित निधि आदि) शामिल होते हैं, और यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि धन विधेयक राज्यसभा में पुनस्थापित नहीं किया जा सकता, यह केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है।
कथन 2 गलत है: धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ अत्यंत सीमित हैं। राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकार या इसमें संशोधन नहीं कर सकती है, वह केवल सिफारिशें कर सकती है और इसे अधिकतम **14 दिनों** (न कि 30 दिनों) की अवधि के लिए रोक सकती है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 109 के अनुसार, यदि लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक राज्यसभा को भेजा जाता है और राज्यसभा 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ उसे वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में लोकसभा ने उसे पारित किया था।
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