BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
3 views

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लष्टीकरण' (Ocean Acidification) तथा महासागरीय जैव-रासायनिक चक्रों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय अम्लष्टीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बढ़ते उत्सर्जन के कारण होता है, जब महासागर इस $CO_2$ का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अवशोषित कर लेते हैं, जिससे महासागरीय जल में हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता बढ़ जाती है और pH मान में गिरावट आती है।
  2. 2. इस प्रक्रिया के दौरान महासागरीय जल में कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की उपलब्धता कम हो जाती है, जो कैल्साइट (Calcite) और एरागोनाइट (Aragonite) जैसी खनिजों के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं, जिससे कोरल रीफ (प्रवाल भित्तियों), मूँगे और शेल्स (कवच) बनाने वाले समुद्री जीवों के लिए कैल्शियम कार्बोनेट का निर्माण करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
  3. 3. महासागरीय अम्लष्टीकरण की यह समस्या उष्णकटिबंधीय (Tropical) क्षेत्रों के गर्म महासागरों में सबसे अधिक गंभीर रूप से प्रकट होती है, क्योंकि ठंडे पानी की तुलना में गर्म पानी में $CO_2$ की घुलनशीलता (Solubility) बहुत अधिक होती है, जिससे उच्च अक्षांशों और ध्रुवीय क्षेत्रों के महासागर इस प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: महासागरीय अम्लष्टीकरण (Ocean Acidification) वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के अवशोषण के कारण होता है। महासागर मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्सर्जित $CO_2$ का लगभग 25-30% हिस्सा सोख लेते हैं। जब $CO_2$ समुद्री जल के साथ घुलती है, तो रासायनिक प्रतिक्रिया के फलस्वरूप हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता बढ़ती है और जल का pH मान कम (यानी अधिक अम्लीय) हो जाता है। कथन 2 सही है: महासागरीय जल में $H^+$ आयनों की अधिकता उपलब्ध कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) के साथ बंध जाती है, जिससे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), मोलस्क और फाइटोप्लांकटोन जैसे कैल्केरस जीवों के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के कंकाल और कवच बनाना कठिन हो जाता है। कथन 3 गलत है: $CO_2$ की घुलनशीलता ठंडे पानी में गर्म पानी की तुलना में **अधिक** होती है। यही कारण है कि आर्कटिक और अंटार्कटिक जैसे ध्रुवीय और उच्च अक्षांशों के ठंडे महासागरीय जल में $CO_2$ तेजी से घुलती है और महासागरीय अम्लष्टीकरण का प्रभाव ध्रुवीय क्षेत्रों में सबसे तीव्र और गंभीर रूप से देखा जाता है, न कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में। अतः कथन 3 असत्य है।
Share:

Related Questions

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) किस अनुच्छेद में वर्णित है? मद्रास महाजन सभा के संस्थापकों में से कौन थे? विस्फोट के कारण चर्चा में रहा माउंट सेमेरु किस देश में स्थित है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद के 'अध्यादेश बनाने की शक्ति' (Ordinance-making power) तथा न्यायपालिका द्वारा इसके न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को संसद के विश्रामकाल (Recess) के दौरान अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश का प्रभाव और बल वही होता है जो संसद द्वारा बनाए गए किसी अधिनियम का होता है, बशर्ते उसे संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित न किया जाए। 2. 'डी. सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों का बार-बार पुनः प्रख्यापन (Repromulgation) करना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध और विधायी शक्ति का अतिक्रमण है, क्योंकि अध्यादेश केवल तात्कालिक और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एक अस्थायी उपाय है। 3. 'कृष्णामूर्ति बनाम भारत संघ (2017)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित किसी भी अध्यादेश को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती कि इसे लाने के पीछे कार्यपालिका की मंशा दुर्भावनापूर्ण थी या संसद सत्र शुरू होने में बहुत कम समय बचा था, क्योंकि अध्यादेश की आवश्यकता और संतुष्टि का विषय पूरी तरह से कार्यपालिका के राजनीतिक विवेक का अनन्य क्षेत्र है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधाई संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) के अंतर्गत विधाई शक्तियों के वितरण और उससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता है कि उसका 'अति-क्षेत्रीय प्रभाव' (Extra-territorial operation) है। 2. यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर संसद द्वारा बनाया गया कानून और राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून एक-दूसरे के विरुद्ध या असंगत होते हैं, तो हमेशा संसद का कानून ही प्रभावी होगा, चाहे राज्य का कानून बाद में बनाया गया हो या उसे राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति प्राप्त हुई हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची (State List) में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.