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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा और इसके निर्धारण के लिए आवश्यक मानदंडों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा सबसे पहले ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा प्रतिपादित की गई थी, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए दो मुख्य मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य है: पहला, उस क्षेत्र में कम से कम 1,500 स्थानिक पादप प्रजातियाँ (Endemic Plant Species) होनी चाहिए जो दुनिया में कहीं और न पाई जाती हों; और दूसरा, उस क्षेत्र को अपनी मूल निवास स्थान (Primary Vegetation) का कम से कम 70% हिस्सा खो देना चाहिए यानी वहाँ भारी मात्रा में पर्यावास विनाश होना चाहिए।
- 2. विश्व स्तर पर जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्रदान करने और उनकी सूची को अद्यतन करने का आधिकारिक उत्तरदायित्व 'अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ' (IUCN) के पास है, जो प्रत्येक वर्ष दुनिया भर के नए पारिस्थितिक तंत्रों का मूल्यांकन करके उनकी आधिकारिक घोषणा करता है।
- 3. भारत के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत वर्तमान में कुल चार जैव विविधता हॉटस्पॉट पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं, जो निम्नलिखित हैं: हिमालय (Himalaya), पश्चिमी घाट (Western Ghats), इंडो-बर्मा क्षेत्र (Indo-Burma Region), और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (जिसमें संपूर्ण सुंडालैंड क्षेत्र शामिल है)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स द्वारा वर्ष 1988 में दी गई थी। किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए दो कड़े मानदंड हैं: (i) उस क्षेत्र में कम से कम 1,500 संवहनी पौधे (vascular plants) स्थानिक प्रजातियों के रूप में होने चाहिए, और (ii) उस क्षेत्र को अपने मूल आवास का कम से कम 70% या उससे अधिक हिस्सा खोना चाहिए (अर्थात गंभीर रूप से खतरे में होना चाहिए)।
कथन 2 गलत है: विश्व स्तर पर जैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान और उनका रखरखाव 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर' (IUCN) द्वारा नहीं, बल्कि 'कंजर्वेशन इंटरनेशनल' (Conservation International - CI) नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा किया जाता है।
कथन 3 गलत है: भारत में कुल चार मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, लेकिन वे (1) पश्चिमी घाट और श्रीलंका, (2) हिमालय, (3) इंडो-बर्मा क्षेत्र, और (4) सुंडालैंड (जिसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं) हैं। अंडमान और निकोबार को स्वतंत्र रूप से नहीं बल्कि सुंडालैंड हॉटस्पॉट के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है, और श्रीलंका पश्चिमी घाट हॉटस्पॉट का हिस्सा है।
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 के अंतर्गत 'संघ के कर्तव्यों' (Duties of the Union) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 355 के अनुसार, यह संघ का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) से रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलाई जा रही है।
2. इस अनुच्छेद में वर्णित 'आंतरिक अशांति' शब्द मूल संविधान में स्पष्ट रूप से शामिल था, जबकि 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा जोड़ा गया था।
3. यदि कोई राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्य करने में विफल रहती है, तो संघ सरकार इस अनुच्छेद के दायित्वों का पालन करते हुए अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए अधिकृत हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, पृथ्वी के आंतरिक भाग (Earth's Interior) की संरचना और भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के संचरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंपीय तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की तरह ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही गमन कर सकती हैं और तरल माध्यम में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं।
2. वैज्ञानिक अध्ययनों और भूकंपीय तरंगों के छाया क्षेत्र (Shadow Zone) के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि पृथ्वी का बाहरी क्रोड (Outer Core) तरल अवस्था में है, क्योंकि S-waves का छाया क्षेत्र 104° से 140° के बीच विस्तृत है, जहाँ कोई भी S-wave दर्ज नहीं की जाती है।
3. पृथ्वी की पपड़ी (Crust) और ऊपरी मेंटल के ठोस भाग को मिलाकर 'स्थलमंडल' (Lithosphere) कहा जाता है, जिसकी मोटाई महाद्वीपों के नीचे सबसे कम और महासागरों के नीचे सर्वाधिक होती है, और इसके ठीक नीचे 'दुर्बलतामंडल' (Asthenosphere) स्थित है जो अत्यधिक पिघली हुई श्यान (Viscous) अवस्था में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम केंद्र (Focus/Hypocenter) से उत्पन्न होने वाली तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और वे केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
2. पृथ्वी के आंतरिक भाग में क्रोड (Core) की सीमा के पास पहुँचने पर S-तरंगों का गायब हो जाना और P-तरंगों का मार्ग से विचलित होकर मंद गति से आगे बढ़ना इस बात का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करता है कि बाहरी क्रोड (Outer Core) तरल अवस्था में है।
3. धरातल पर पहुँचने वाली 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-waves) शरीरिक तरंगों (Body Waves) की तुलना में अधिक गहराई तक यात्रा करती हैं और पृथ्वी के केंद्र से गुजरते हुए सबसे अधिक विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस कब मनाया जाता है?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) तथा उनके निर्माण और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से प्रचलित हवाएँ (Prevailing Winds), पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), और जल के घनत्व में भिन्नता (तापमान और लवणता के कारण) उत्तरदायी होती हैं, जिसमें व्यापारिक हवाएँ और पछुआ हवाएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
2. 'एल नीनो' (El Niño) घटना के दौरान, दक्षिणी प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास ठंडी धारा (पेरू या हम्बोल्ट धारा) का प्रभाव अत्यधिक प्रबल हो जाता है, जिससे उस क्षेत्र में जल का तापमान असामान्य रूप से गिर जाता है और भारतीय मानसून पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण अपनी दाईं ओर (Clockwise) मुड़ जाती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वे अपनी बाईं ओर (Counter-clockwise) मुड़ जाती हैं, जो फेरेल के नियम के अनुरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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