त्वरित लिंक्स
Indian Polity
9 views
प्रस्तावना में 'समाजवादी' शब्द कब जोड़ा गया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1976 (42वां संशोधन)।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उस राज्य के लिए मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करना अनिवार्य नहीं है।
2. अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन की शक्ति सौंपी गई है, और इन विषयों पर विधि बनाने की शक्ति केवल संसद के पास निहित है।
3. अनुच्छेद 243-E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष का होता है, और यदि किसी पंचायत को समय से पूर्व विघटित कर दिया जाता है, तो विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है, बशर्ते पंचायत का शेष कार्यकाल छह मास से कम का न हो।
4. 73वें संविधान संशोधन के द्वारा प्रत्येक राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसका प्रमुख राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, और उसे उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) का विचार ब्रिटिश मूल से लिया गया है और यह एक नकारात्मक अवधारणा है क्योंकि यह विशेषाधिकारों के अभाव को इंगित करती है, जबकि 'विधियों के समान संरक्षण' (Equal protection of the laws) का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया है जो सकारात्मक अवधारणा है और यह समानों में समान व्यवहार की अपेक्षा करता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कोई भी नागरिक किसी भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार को करने का अधिकार रखता है, किंतु राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का पूर्ण प्रतिबंध (Absolute Ban) लगा सकता है और इसके लिए उसे कोई विधिक या लोकहित संबंधी तर्कसंगत आधार न्यायालय में सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे- मेनका गांधी बनाम भारत संघ मामले) में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के दायरे में केवल शारीरिक स्वतंत्रता ही शामिल नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार, प्रदूषणमुक्त जल और वायु का अधिकार, तथा त्वरित विचारण (Speedy Trial) का अधिकार भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, उनके स्वतंत्र कामकाज और विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसके लिए यह अनिवार्य है कि वह उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो, और उसे भारत सरकार के विधि मामलों में सलाह देने के साथ-साथ देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है, किंतु वह भारत सरकार का पूर्णकालिक सरकारी सेवक नहीं होता है।
2. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उसकी संयुक्त बैठक में तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका उसे सदस्य बनाया जाए, बोलने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 88 के तहत उसे संसद की किसी भी कार्यवाही में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद भारतीय शासन प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है, और CAG भारत की संचित निधि तथा प्रत्येक राज्य व संघ राज्य क्षेत्र (जहाँ विधानसभा हो) की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है, तथा अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति और राज्यपालों के माध्यम से संसद और राज्य विधानमंडलों के समक्ष रखवाता है।
4. CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, और अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सीएजी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद को धारण करने के लिए पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संसद की लोक लेखा समिति (PAC) का कार्यकाल कितना होता है?
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनके कर्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद की किसी भी समिति की सदस्यता या कार्यवाही के दौरान मतदान करने (Voting) का कोई विधिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित वारंट द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
3. भारत के CAG की रिपोर्ट के आधार पर लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) अपनी जांच करती है और संसद के समक्ष अपनी रिपोर्ट रखती है, किंतु CAG को 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' के रूप में लोक लेखा समिति के प्रत्येक सत्र में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.