त्वरित लिंक्स
Civil services
7 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
- 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक अपने पद पर छह वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) बने रहने का अधिकार रखता है, और पद पर न रह जाने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय का पात्र होता है।
- 3. अनुच्छेद 149 के तहत सीएजी संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए संघ और राज्यों के खातों के संबंध में अपने कर्तव्यों का पालन करता है और अपनी रिपोर्टें राष्ट्रपति को (जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के पटल पर रखवाते हैं) तथा राज्यपाल को (जो उन्हें राज्य के विधानमंडल के पटल पर रखवाते हैं) प्रस्तुत करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उसे उसके पद से केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की रीति और आधारों पर ही हटाया जा सकता है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 148(4) के अनुसार, CAG अपने पद की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय (Employment) का पात्र नहीं होता है।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 149 के अंतर्गत CAG संघ और राज्यों के लेखाओं से संबंधित रिपोर्ट तैयार करता है। संघ के लेखाओं से संबंधित अपनी रिपोर्ट वह राष्ट्रपति को सौंपता है जो उसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, और राज्यों के लेखाओं से संबंधित रिपोर्ट वह संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है जो उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
Related Questions
→
बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल कौन था?
→
निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्ध केंद्र बुद्ध के जीवनकाल में उनसे सीधे रूप में संबद्ध नहीं था?
→
असहयोग आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ किया गया?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) तथा आपातकालीन प्रावधानों के तहत विधायी शक्तियों के वितरण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और किसी भी संसदीय कानून को इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उसका 'अतिरिक्त प्रादेशिक विस्तार' (Extra-territorial operation) है।
2. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. जब भारत में अनुच्छेद 352 के तहत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) प्रवृत्त होता है, तब संसद को राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर पूरे या भारत के किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और आपातकाल की समाप्ति के पश्चात संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानून अनिश्चितकाल तक तब तक प्रभावी बने रहते हैं जब तक कि राज्य का विधानमंडल उन्हें निरस्त या संशोधित नहीं कर देता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं - अनुच्छेद 308 से 323) के अंतर्गत लोक सेवा आयोगों और अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, संसद को कानून द्वारा संघ और राज्यों के लिए एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाएं (जिनमें वर्तमान में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा शामिल हैं) सृजित करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से ऐसा करने के लिए संकल्प पारित करे।
2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के किसी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही, उच्चतम न्यायालय के प्रतिवेदन पर और कदाचार के आधार पर हटाया जा सकता है, तथा संविधान के अनुसार इन आयोगों के सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन (Employment) के लिए पूर्णतः अपात्र घोषित किया गया है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.