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Indian Polity
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कैबिनेट मिशन कब भारत आया?

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1946।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, पद की शक्तियों और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई भूमिका नहीं होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रतिबंध केवल केंद्र सरकार पर लागू होता है, राज्य सरकारों के मंत्रिपरिषद की संख्या पर इसका कोई संवैधानिक प्रभाव नहीं है। 3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत (Collective Responsibility) के तहत यदि लोकसभा द्वारा किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, अवमानना क्षेत्राधिकार (Contempt Jurisdiction) तथा न्यायिक स्वतंत्रता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) होगा तथा उसे अपनी अवमानना के लिए, जिसमें सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना दोनों शामिल हैं, दंड देने की शक्ति प्राप्त है, और यह अवमानना दंडित करने की शक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन सीमित नहीं की जा सकती क्योंकि यह उसकी अंतर्निहित संवैधानिक शक्ति है। 2. न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी न्यायिक कार्यवाही या निर्णय के संबंध में कोई निष्पक्ष, सदाशयतापूर्ण और उचित आलोचना (Fair and Reasonable Criticism) की जाती है, तो उसे आपराधिक अवमानना की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। 3. संविधान के अनुच्छेद 145 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को भारत के राष्ट्रपति के अनुमोदन से न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इसके तहत बनाए गए कोई भी नियम संसद के किसी अधिनियम या संविधान के किसी अन्य उपबंध के प्रतिकूल होने पर स्वतः शून्य हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत समाहित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्थान नहीं दिया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान में जोड़ा गया, जिसमें समिति ने मूल रूप से नागरिकों के लिए करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक अनिवार्य कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी। 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य (6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना) 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था, तथा यह प्रावधान किया गया कि ये कर्तव्य नागरिकों के साथ-साथ भारत के राज्यक्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होंगे। 3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Non-justiciable) है और इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती, तथापि संसद को यह विधाई शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर इनके क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर सकती है और अवहेलना की स्थिति में शास्ति (Penalty) या दंड का प्रावधान कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के पंजीकरण का अधिकार भारत के बाहर स्थित राजनयिक या कौंसुलरी (Diplomatic or Consular) प्रतिनिधियों के पास है, बशर्ते उन्होंने निर्धारित प्रपत्र में आवेदन किया हो। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'वंश द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Descent) के प्रावधान के अनुसार, 10 दिसंबर 1992 या उसके पश्चात् विदेश में जन्मा व्यक्ति भारत का नागरिक तभी बन सकता है जब उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक (न कि केवल पिता) भारत का नागरिक हो। 3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसी नागरिकता का उपभोग जारी रखेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी परिस्थिति में विधि बनाकर किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी शर्त के हमेशा के लिए समाप्त कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1955 के विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (PIOs) के नागरिकता के अधिकारों से संबंधित है, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी अविभाजित भारत में पैदा हुआ था, तो वह भारत का नागरिक माना जाएगा, बशर्ते उसने भारत के राजनयिक या कौंसुलरी प्रतिनिधि के पास पंजीकरण करा लिया हो, चाहे संविधान लागू होने से पहले या उसके पश्चात। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीकरण द्वारा' (By Naturalization) नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो, तथा उसे भारत में कम से कम 12 वर्षों तक सामान्य रूप से निवास करना अनिवार्य होता है। 3. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता 'वंचना द्वारा' (By Deprivation) समाप्त कर दी जाती है, जिसकी घोषणा केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करके की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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