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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना' (Public Digital Infrastructure - PDI) और भारत के डिजिटल सार्वजनिक वस्तु (DPG) पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'इंडिया स्टैक' (India Stack) के अंतर्गत आने वाले प्रमुख घटक, जैसे कि आधार (Aadhaar), यूपीआई (UPI) और डिजीलॉकर (DigiLocker), ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर पर आधारित हैं और इन्हें 'डिजिटल पब्लिक गुड्स' (DPGs) के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्यता दी गई है, जिन्हें कोई भी राष्ट्र अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपना सकता है।
- 2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विकसित और प्रबंधित 'यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस' (UPI) प्रत्यक्ष रूप से 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) का एक अंतर्निहित भाग है, जिसका संचालन राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा किया जाता है।
- 3. 'खाद्य सुरक्षा और पोषण' के वैश्विक संदर्भ में भारत द्वारा विकसित 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM) को संयुक्त राष्ट्र के डिजिटल पब्लिक गुड्स रजिस्ट्री में विश्व के सबसे बड़े कृषि-विपणन सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में आधिकारिक तौर पर वर्गीकृत किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'इंडिया स्टैक' के तहत आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर आदि ओपन-एपिआई (Open APIs) और ओपन-सोर्स सिद्धांतों पर आधारित डिजिटल पब्लिक गुड्स (DPGs) हैं, जिन्हें भारत सरकार द्वारा 'Public Digital Infrastructure' के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है और अन्य देश भी इसे अपना रहे हैं।
कथन 2 गलत है: UPI का प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा किया जाता है, न कि सीधे RBI द्वारा (यद्यपि RBI इसके विनियमन की देखरेख करता है)। इसके अतिरिक्त, 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) ई-कॉमर्स के लोकतंत्रीकरण के लिए एक अलग पहल है जो UPI से स्वतंत्र रूप से ई-कॉमर्स प्रोटोकॉल पर कार्य करती है।
कथन 3 गलत है: 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM) सरकारी खरीद (Public Procurement) के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल है, न कि खाद्य सुरक्षा या कृषि-विपणन से जुड़ा कोई सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, और न ही इसे इस रूप में संयुक्त राष्ट्र की रजिस्ट्री में वर्गीकृत किया गया है। अतः केवल कथन 1 सही है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Global Multidimensional Poverty Index - MPI) और भारत में गरीबी आकलन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए जाने वाले वैश्विक MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान भारांश वाले आयामों के अंतर्गत कुल दस संकेतकों का उपयोग किया जाता है।
2. नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक, वैश्विक MPI के तीन आयामों और दस संकेतकों के साथ-साथ दो नए संकेतकों - 'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account) को जोड़कर कुल बारह संकेतकों के आधार पर राज्यों की गरीबी का आकलन करता है।
3. बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अंतर्गत उस व्यक्ति को 'बहुआयामी रूप से गरीब' माना जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीनों आयामों के सभी दस संकेतकों में एक साथ वंचित (Deprived) पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार, राष्ट्रपति संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, जब युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के कारण भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रखने के प्रत्येक प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों द्वारा उद्घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (अर्थात सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के दौरान, संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए किसी पृथक राष्ट्रपति के आदेश की आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर लगाया गया हो, न कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' (कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध - अनुच्छेद 330 से 342क) के अंतर्गत अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाता है, तथा 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा इस आरक्षण की अवधि को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक कर दिया गया है।
2. संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत गठित 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों और पदावधि का निर्धारण करने की शक्ति संसद के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
3. संविधान के अनुच्छेद 342क के अनुसार, राष्ट्रपति किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, राज्यपाल (या उस राज्य के प्रशासक) से परामर्श करने के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा उन सामाजिक और शैक्षणिक जातियों को निर्दिष्ट कर सकता है जिन्हें उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में 'सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग' (SEBC) माना जाएगा, तथा किसी जाति को इस सूची में जोड़ने या हटाने की अंतिम शक्ति केवल संसद में निहित है, राष्ट्रपति में नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा इसके अतिरिक्त अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (International form of Indian numerals) होगा, किंतु संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा पंद्रह वर्ष की अवधि (1965 तक) के बाद भी सरकारी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सके।
2. संविधान की 'आठवीं अनुसूची' में मूल रूप से चौदह भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से बढ़ाया गया, जिसके तहत वर्ष 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को शामिल किए जाने के पश्चात वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 351 के अनुसार, यह संघ का कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति (Composite culture) के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए उसे अन्य भारतीय भाषाओं - विशेष रूप से संस्कृत से - शब्दावली ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है, न कि किसी अन्य विदेशी भाषा से।
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हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
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