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Indian Polity
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'विधि के समक्ष समानता' का अधिकार देता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करता है।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना, किंतु यह प्रस्तावना स्वयं अपने आप में न तो न्यायोचित (Justiciable) है और न ही इसकी प्रकृति गैर-न्यायोचित है, बल्कि यह विधानमंडलों को कानून बनाने की असीमित शक्ति प्रदान करती है।
2. प्रस्तावना में अब तक कुल दो बार संशोधन किया जा चुका है—प्रथम संशोधन 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा किया गया जिसके तहत 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए, तथा द्वितीय संशोधन 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा किया गया जिसके तहत मूल अधिकारों की प्रस्तावना में पुनरावृत्ति की गई।
3. बेरूबारी यूनियन वाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है, किंतु बाद में केशवानंद भारती वाद (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है और संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते यह संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करें, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया और रीति वही होती है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की होती है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग, चुनाव खर्च के राज्य द्वारा वित्तपोषण (State Funding of Elections) और राजनीतिक दलों के खातों की अनिवार्य ऑडिटिंग से संबंधित महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की थी।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत एक उम्मीदवार को अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने की अनुमति है, तथा यदि कोई व्यक्ति दोनों सीटों से जीत जाता है, तो उसे अपनी स्वेच्छा से एक सीट छह महीने के भीतर खाली करनी होती है, अन्यथा दोनों सीटें रिक्त घोषित कर दी जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' (Legislative Assembly) और 'विधान परिषद' (Legislative Council) की संरचना, गठन तथा उनकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उसकी समाप्ति के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे।
2. विधान परिषद के कुल सदस्यों की संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि इसके कुछ ऐतिहासिक अपवाद (जैसे जम्मू-कश्मीर विधान परिषद जब वह अस्तित्व में थी) भी रहे हैं।
3. विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है, जिसमें 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों द्वारा, 1/12 सदस्य स्नातकों द्वारा और 1/12 सदस्य अध्यापकों द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों में से कुल सदस्यों के 1/6 भाग का मनोनयन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की स्वतंत्रता, प्रशासनिक शक्तियों तथा उनके सदस्यों के संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और प्रत्येक आयोग के सदस्यों में से कम-से-कम आधे ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो नियुक्ति की तारीख तक भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ही राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है, जिसके लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच और प्रतिवेदन का होना अनिवार्य होता है, और इस जाँच के दौरान राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा संबंधित सदस्य को निलंबित करने की शक्ति केवल संघ आयोग के संदर्भ में राष्ट्रपति के पास होती है, राज्य आयोगों के सदस्यों के संबंध में राज्यपाल के पास नहीं।
3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति पर भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, किंतु संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपनी पदावधि समाप्त होने पर किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने की पात्रता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अनुच्छेद 356 कब लगता है?
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