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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-A' (क्रमशः पंचायतें और नगरपालिकाएं) के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा देश में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगरपालिकाओं की स्थापना को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया, जिसके तहत इन निकायों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने की शक्ति प्रत्येक राज्य के राज्यपाल में निहित की गई है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अनुसार, राज्य के विधानमंडल विधि द्वारा पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकते हैं जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसमें ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों से संबंधित योजनाओं को तैयार करना और उनका कार्यान्वयन शामिल है।
- 3. किसी भी पंचायत या नगरपालिका के विघटन के पश्चात यदि उसका कार्यकाल छह महीने से कम का शेष रहता है, तो ऐसी स्थिति में नई पंचायत या नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है और विघटन के बाद शेष बची अवधि के लिए नए चुनाव कराना आवश्यक नहीं माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने की शक्ति राज्य के राज्यपाल में नहीं, बल्कि 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) में निहित की गई है, जिसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है लेकिन उसे हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 243-G (ग्यारहवीं अनुसूची) पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने हेतु 29 विषयों पर अधिकार प्रदान करता है। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 243-E और 243-U के अनुसार, यदि किसी पंचायत या नगरपालिका का विघटन होता है और उसका शेष कार्यकाल छह महीने से कम है, तो नई पंचायत का गठन करना आवश्यक नहीं होता है, और शेष अवधि के लिए चुनाव कराना अनिवार्य नहीं है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के…
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति और उसके 'साख नियंत्रण उपकरणों' (Credit Control Instruments) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मात्रात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Quantitative Instruments) के अंतर्गत 'वैधानिक तरलता अनुपात' (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को अपनी कुल मांग और समय देयताओं (NDTL) का एक निश्चित हिस्सा तरल परिसंपत्तियों (जैसे नकदी, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों) के रूप में अपने पास रखना होता है, जिसे RBI के पास रखना अनिवार्य होता है।
2. गुणात्मक या चयनात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Qualitative/Selective Instruments) के तहत 'सीमांत आवश्यकता' (Margin Requirement) ऋण के लिए गिरवी रखी गई संपार्श्विक (Collateral) संपत्ति के बाजार मूल्य और बैंक द्वारा उस संपत्ति के एवज में दिए जाने वाले ऋण के बीच का अंतर होता है, जिसे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दौरान बढ़ा दिया जाता है।
3. 'सीमांत स्थायी सुविधा' (MSF) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी कुल NDTL के एक निश्चित प्रतिशत तक की आपातकालीन अल्पकालिक तरलता की कमी को पूरा करने के लिए RBI से रेपो रेट से भी अधिक ब्याज दर पर ओवरनाइट ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित वित्तपोषण' (Green Financing) और 'सॉवरन ग्रीन बॉंड' (Sovereign Green Bonds - SGrBs) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले 'सॉवरन ग्रीन बॉंड' (SGrBs) से प्राप्त आय को देश के सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे निवेशों में तैनात किया जाता है जो अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को कम करने में सहायता करते हैं, तथा इनमें वे सभी बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं भी शामिल हैं जिनकी क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है।
2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 'इक्विटी लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स' (LODR) विनियमों के तहत, भारत में ग्रीन डेट सिक्योरिटीज (Green Debt Securities) जारी करने वाले संस्थाओं के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे जारी किए गए फंड के उपयोग की निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन के लिए एक स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय (Third-party) समीक्षा या प्रमाणन प्राप्त करें।
3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बांडों के लिए 'ग्रीन बॉंड प्रिंसिपल्स' (GBPs) को बढ़ावा देने और उनके मानकीकरण को सुनिश्चित करने का कार्य मुख्य रूप से 'अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ' (ICMA) द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (Article 32) और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली 'रिट' (Writs) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (जिनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण शामिल हैं) जारी करने का मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) प्राप्त है, जो कि अनन्य (Exclusive) नहीं है क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी यह शक्ति प्राप्त है।
2. 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ 'को शरीर को प्रस्तुत किया जाए' है, जिसे सार्वजनिक प्राधिकरण या निजी व्यक्ति दोनों के विरुद्ध अवैध नजरबंदी के खिलाफ जारी किया जा सकता है, तथा यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने का एक अत्यंत शक्तिशाली उपाय है।
3. 'अधिकार-पृच्छा' (Quo-Warranto) रिट किसी सार्वजनिक पद पर किसी व्यक्ति के दावे की वैधता की जांच करने के लिए जारी की जाती है, और इस रिट को दायर करने के लिए यह आवश्यक है कि याचिकाकर्ता स्वयं उस पद पर नियुक्ति के लिए पीड़ित या प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति (Aggrieved Person) हो।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (National Clean Air Programme - NCAP) और वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (NCAP) देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के विशिष्ट गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।
2. इस कार्यक्रम का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक आधार वर्ष (Base Year 2017) की तुलना में देश के लक्षित शहरों में पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5 दोनों) की सांद्रता में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% की कमी का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. NCAP के अंतर्गत निर्धारित किए गए लक्ष्य और कार्य-योजनाएँ केवल केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन लागू की जाती हैं, तथा इसके क्रियान्वयन में राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) की कोई वैधानिक या अनुकरणीय भूमिका नहीं होती है।
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हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
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