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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में देश के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए शुरू किया गया था, जिसके अंतर्गत सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर होने वाले कुल पूंजीगत व्यय में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग समान रूप से (प्रत्येक की एक तिहाई) परिकल्पित की गई है।
- 2. 'प्रधानमंत्री गति शक्ति - राष्ट्रीय मास्टर प्लान' एक डिजिटल मंच है जो अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों (सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, मास ट्रांसपोर्ट, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा) के विकास को समेकित करने और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के डेटा को एक मंच पर लाता है।
- 3. NIP और PM GatiShakti दोनों ही पहलों का मुख्य उद्देश्य केवल केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष बजट आवंटन पर निर्भर रहना है, और इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के तहत अनुमानित पूंजीगत व्यय में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की हिस्सेदारी लगभग 39-39 प्रतिशत है, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है, जो समान नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि 'प्रधानमंत्री गति शक्ति - राष्ट्रीय मास्टर प्लान' बुनियादी ढांचे के एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन के लिए अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों को जोड़ता है और विभिन्न मंत्रालयों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल, निजी निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की महत्वपूर्ण भूमिका है, और इन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मौर्योत्तर काल (Post-Maurya Period) की वास्तुकला और मूर्तिकला शैलियों — विशेष रूप से 'गांधार' (Gandhara), 'मथुरा' (Mathura) और 'अमरावती' (Amaravati) कला शैलियों — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधार कला शैली पर यूनानी (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके तहत बुद्ध की मूर्तियों में यथार्थवादी शारीरिक संरचना, घुंघराले बाल, और रोमन शैली के वस्त्रों (Toga) जैसी विशेषताएँ प्रदर्शित की गईं, तथा इस शैली में मूर्तियों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से काले-नीले शिस्ट (Schist) पत्थर का उपयोग किया गया था।
2. मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी थी और इस पर जैन, बौद्ध तथा ब्राह्मण धर्म तीनों का प्रभाव देखने को मिलता है, जिसमें बुद्ध की पहली बार मानव रूप में मूर्तियाँ गांधार शैली से भी पहले गढ़ी गईं और इसके निर्माण में मुख्य रूप से धब्बेदार लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone) का प्रयोग किया गया था।
3. अमरावती कला शैली मुख्य रूप से कृष्णा-गोदबारी घाटी में सातवाहन शासकों के संरक्षण में विकसित हुई, जिसमें संगमरमर (White Marble) का व्यापक उपयोग किया गया तथा इसमें बुद्ध के जीवन की घटनाओं को मुख्य रूप से स्वतंत्र और एकल मूर्तियों के रूप में दर्शाया गया है, न कि आख्यानात्मक रिलीफ (Narrative Reliefs) के रूप में।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद की वित्तीय समितियों' (Financial Committees) — अर्थात् प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक लेखा समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है।
2. प्राक्कलन समिति देश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा को कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है, तथा इस समिति का मुख्य कार्य बजट में अनुमानित खर्चों की जांच करना और सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता लाने के लिए सुझाव देना है।
3. सार्वजनिक उपक्रम समिति का गठन वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति पर किया गया था, जिसमें कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं, और इस समिति का अध्यक्ष हमेशा राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' (Biological Diversity Act, 2002) और उससे जुड़े संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 रियो डी जेनेरियो में आयोजित 'जैविक विविधता पर कन्वेंशन' (CBD) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अधिनियमित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य जैविक संसाधनों का संरक्षण, उनके घटकों का सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का न्यायसंगत और निष्पक्ष बंटवारा करना है।
2. इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) की स्थापना की जाती है, जो कि एक सांविधिक निकाय है, तथा यह प्राधिकरण विदेशी नागरिकों, निगमों या अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा किसी भी जैविक संसाधन को प्राप्त करने या जैव-सर्वेक्षण करने के लिए पूर्व अनुमति देना अनिवार्य बनाता है।
3. इस त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर गठित 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) आती हैं, जिनमें 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' को देश के सभी क्षेत्रों में जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Sites) घोषित करने की अनन्य और अंतिम शक्ति प्राप्त होती है, जिसमें राज्य सरकारों की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय वास्तुकला की 'नागर', 'द्रविड' और 'बेसर' शैलियों तथा उनसे संबंधित मंदिरों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागर शैली के मंदिर वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली है, जिसके प्रमुख लक्षणों में शिखर का वक्ररेखी (Curvilinear) होना, प्रांगण में विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) का होना तथा मंदिर परिसर के भीतर बड़े पैमाने पर विशाल जल कुंडों का निर्माण अनिवार्य रूप से शामिल है।
2. द्रविड शैली के मंदिरों की मुख्य पहचान उनकी पिरामिडनुमा बहुमंजिला विमाना संरचना, गर्भगृह के ठीक ऊपर स्थित पिरामिड के आकार का शिखर, और मंदिर परिसरों में भव्य 'गोपुरम' (प्रवेश द्वार) का होना है, जो दक्षिण भारत के चोल और पल्लव वास्तुकला में विशेष रूप से विकसित हुए।
3. बेसर शैली (जिसे विंध्य से कृष्णा नदी के बीच चालुक्य और राष्ट्रकूट राजवंशों के संरक्षण में विकसित किया गया) नागर और द्रविड शैलियों का एक संकर रूप (Hybrid style) है, जिसमें मंदिरों के योजना विन्यास और शिखरों में दोनों शैलियों के तत्वों का समिश्रण देखने को मिलता है।
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हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
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