BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
4 views

भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'रामसर अभीसमय' (Ramsar Convention) और भारत में 'आर्द्रभूमियों' (Wetlands) के संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. रामसर अभीसमय वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी संधि है, जो आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग (Wise use) के लिए एक राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का फ्रेमवर्क प्रदान करती है, तथा यह जैविक विविधता सम्मेलन (CBD) के अंतर्गत औपचारिक रूप से संचालित होती है।
  2. 2. 'अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि' (Ramsar Sites) की सूची में किसी स्थल को शामिल करने के लिए यह आवश्यक है कि वह स्थल जलपक्षियों (Waterbirds) के लिए वर्ष के किसी भी समय 20,000 या उससे अधिक पक्षियों को आश्रय देता हो, या पक्षियों की किसी प्रजाति या उप-जाति की वैश्विक आबादी के कम-से-कम 1% भाग को नियमित रूप से अपने यहाँ धारण करता हो।
  3. 3. 'मॉन्ट्रो रिकॉर्ड' (Montreux Record) रामसर सूची के अंतर्गत आने वाले ऐसे आर्द्रभूमि स्थलों का एक रजिस्टर है जहाँ पारिस्थितिकीय परिवर्तन, तकनीकी विकास या मानवीय हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गया है या उत्पन्न होने की संभावना है, और वर्तमान में भारत की चिल्का झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान दोनों इसी रिकॉर्ड के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: रामसर अभीसमय (Ramsar Convention) पर 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1975 में लागू हुआ। यद्यपि यह प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) द्वारा इसे अपने सचिवालय के रूप में स्थापित किए जाने के कारण वैश्विक स्तर पर कार्य करता है, तथापि यह 'जैविक विविधता सम्मेलन' (CBD) का औपचारिक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली संधियों में से एक है। कथन 2 सही है: रामसर साइट के रूप में किसी आर्द्रभूमि को नामित करने के लिए स्थापित नौ मानदंडों (Criteria) में से एक मानदंड यह भी है कि यदि कोई स्थल जलपक्षियों (Waterbirds) की किसी एक प्रजाति या उप-जाति की वैश्विक आबादी के 1% या उससे अधिक व्यक्तियों को नियमित रूप से आश्रय देता है, या यदि वह कुल मिलाकर 20,000 या उससे अधिक जलपक्षियों को धारण करता है, तो वह इस सूची में शामिल किए जाने की अर्हता रखता है। कथन 3 गलत है: मॉन्ट्रो रिकॉर्ड (Montreux Record) रामसर स्थलों की सूची के तहत उन आर्द्रभूमि स्थलों का रजिस्टर है जहाँ मानवीय हस्तक्षेप, प्रदूषण या अन्य कारकों के कारण पारिस्थितिक स्वरूप में परिवर्तन हुआ है, हो रहा है या होने की संभावना है। चिल्का झील (ओडिशा) को शुरुआत में मॉन्ट्रो रिकॉर्ड में शामिल किया गया था, किंतु इसके पारिस्थितिक स्वास्थ्य में सफल सुधार और बहाلي के बाद वर्ष 2003 में इसे इस रिकॉर्ड से बाहर (Removal) कर दिया गया था। वर्तमान में भारत के केवल दो स्थल - केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और लोकटक झील (मणिपुर) - मॉन्ट्रो रिकॉर्ड में सूचीबद्ध हैं। अतः कथन 3 गलत है क्योंकि चिल्का झील वर्तमान में इस रिकॉर्ड में नहीं है।
Share:

Related Questions

भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - Ngt) के गठन, क्षेत्राधिकार एवं कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत स्थापित एनजीटी (NGT) एक सांविधिक निकाय है, जिसे पर्यावरण संरक्षण, वनों के संवर्धन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के सख्त और पारंपरिक नियमों का पालन करने की कानूनी बाध्यता नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होकर कार्य करता है। 2. एनजीटी के पास देश के किसी भी ऐसे आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध पुनरीक्षण (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके आदेश के विरुद्ध यदि कोई अपील दायर करनी हो, तो वह सीधे और केवल संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में ही 90 दिनों के भीतर की जा सकती है, सर्वोच्च न्यायालय में नहीं। 3. यह अधिकरण पर्यावरण से जुड़े मामलों का निपटारा करते समय वैधानिक रूप से 'प्रदूषक भुगतान करेगा' (Polluter Pays Principle), 'निवारक सिद्धांत' (Precautionary Principle) और 'सतत विकास' (Sustainable Development) के सिद्धांतों को लागू करने की पूर्ण शक्ति रखता है。 उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) की उत्पत्ति और उनके प्रवाह को प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरीय धाराओं के संचलन के लिए प्राथमिक रूप से पृथ्वी का घूर्णन (Rotation of the Earth), वायुदाब और पवनें (विशेषकर प्रचलित पवनें या Planetary Winds), तथा महासागरीय जल के तापमान एवं लवणता में भिन्नता के कारण उत्पन्न घनत्व अंतर उत्तरदायी होते हैं। 2. कोरियोलिस बल (Coriolis Force) के प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Counter-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जो कि फेरल के नियम के अनुरूप है। 3. अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर बहती है और ब्रिटिश द्वीप समूह एवं पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान तापमान को अत्यधिक कम कर देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति' (Power of President to consult Supreme Court) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति किसी भी सार्वजनिक महत्व के विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांग सकता है, और यह परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction) केवल उच्चतम न्यायालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालयों पर भी लागू होता है। 2. यदि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के खंड (1) के तहत किसी मामले को उच्चतम न्यायालय के पास परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो उच्चतम न्यायालय राष्ट्रपति को अपनी राय देने के लिए बाध्य होता है, किंतु राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं होता है। 3. संविधान के लागू होने से पहले की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों से उत्पन्न होने वाले विवादों के संदर्भ में यदि राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांगता है (खंड 2 के तहत), तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन प्रक्रिया और इससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन, संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार, या सातवीं अनुसूची की सूचियाँ) में संशोधन करने के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से पारित होना आवश्यक है, बल्कि कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उनका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है। 3. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, यहाँ तक कि वह संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) में भी परिवर्तन या संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह विशेष बहुमत से पारित हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? सतत विकास का मुख्य अर्थ क्या है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.