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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया (Amendment of the Constitution) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रक्रिया का आरंभ केवल संसद के किसी भी सदन में इस प्रयोजन के लिए विधेयक प्रस्तुत करके किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) अनिवार्य होती है।
  2. 2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों, जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण, या संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, में संशोधन के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक है, बल्कि कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उसका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है।
  3. 3. केशवानंद भारती वाद (1973) के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को संशोधित या नष्ट नहीं कर सकती है, तथा न्यायपालिका द्वारा संविधान के मूल ढाँचे के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा, स्वतंत्र न्यायपालिका और लोकतंत्र जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है, लेकिन इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation/Permission) की आवश्यकता नहीं होती है। विधेयक दोनों सदनों में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए जाता है, और राष्ट्रपति को इस पर अनुमति देनी ही पड़ती है (संविधान संशोधन विधेयक के मामले में राष्ट्रपति वीटो का प्रयोग नहीं कर सकता है)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 368 के अनुसार, संघीय व्यवस्था से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति का चुनाव, संघ और राज्यों की कार्यपालिका या विधायी शक्तियों का विस्तार, उच्चतम और उच्च न्यायालय, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व आदि) में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन आवश्यक है। कथन 3 सही है: ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय की 13 जजों की बेंच ने यह फैसला दिया था कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं कर सकती। न्यायिक समीक्षा, स्वतंत्र न्यायपालिका, संविधान की सर्वोच्चता और लोकतंत्र आदि इसके प्रमुख घटक हैं।
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