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Indian Polity
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अनुच्छेद 44 क्या है?

Detailed Explanation

समान नागरिक संहिता।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का क्षेत्र, उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से सेवारत न हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके नीचे के अन्य न्यायालय शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से जुड़े मामले शामिल हैं, पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और उच्च न्यायालय की इसमें केवल परामर्शदात्री भूमिका होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, उनकी न्यायसंगतता और उनके कानूनी क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्त्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायसंगत (Enforceable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर किसी भी व्यक्ति द्वारा न्यायालय की शरण नहीं ली जा सकती है। 2. यद्यपि अधिकांश नीति निर्देशक तत्व गैर-न्यायसंगत हैं, तथापि संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों, जैसे अनुच्छेद 39(f) के तहत बालकों के स्वास्थ्य और विकास के लिए अवसर सुनिश्चित करना, को प्रभावी बनाने के लिए यदि संसद कोई कानून बनाती है, तो उसे न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। 3. अनुच्छेद 45 के मूल पाठ में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 से पूर्व 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा' का प्रावधान था, जिसे इस संशोधन के बाद अनुच्छेद 21A के तहत मूल अधिकार बना दिया गया, और वर्तमान अनुच्छेद 45 में केवल चौदह वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान रखा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित सिफारिश प्राप्त होने पर ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि, बिना किसी विशेष अनुमोदन के, लगातार तीन वर्षों तक बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते प्रत्येक छह महीने पर संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से इसका अनुमोदन किया जाता रहे। भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-क जोड़ा गया है जिसका शीर्षक 'नगरपालिकाएँ' है और इसे अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक समाविष्ट किया गया है, तथा इसके साथ ही बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले कुल 18 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है। 2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में तीन प्रकार की नगरपलिकायें—नगर पंचायत (संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए), नगर परिषद (छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए) और नगर निगम (बृहतर नगरीय क्षेत्र के लिए) का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु उस क्षेत्र की जनसंख्या, आर्थिक महत्व और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल को किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए नगरपालिका के गठन से छूट देने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है। 3. नगरपालिकाओं के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरी जाने वाली कुल सीटों में से महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित होनी चाहिए, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल सामान्य सीटों तक ही सीमित है और इसे नगरपालिकाओं के अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर लागू नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई है कि यदि किसी समय लोकहित में यह प्रतीत होता है कि एक ऐसी परिषद् की स्थापना की जानी चाहिए जो राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और सलाह दे तथा राज्यों और संघ के सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करे, तो राष्ट्रपति ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है। 2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका उल्लेख मूल संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया था, और इसकी स्थापना वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के तुरंत बाद कर दी गई थी। 3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का पहली बार औपचारिक रूप से गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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