Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 18 times
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, क्षेत्राधिकार और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित निपटान के लिए की गई थी, और यह भारत का ऐसा पहला विशेष निकाय है जिसने पर्यावरण कानूनों को लागू करने के लिए नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के प्रावधानों के बजाय 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) पर काम करने का प्रावधान किया है।
- 2. अधिकरण के पास यह शक्ति प्राप्त है कि वह पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई कर सकता है और पर्यावरण क्षति के लिए उत्तरदायी पक्षों को मुआवजा प्रदान करने तथा प्रभावित क्षेत्रों को पूर्ववत स्थिति में लाने का आदेश जारी कर सकता है।
- 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों से व्यथित कोई भी व्यक्ति या पक्ष, अधिकरण के आदेश के 90 दिनों के भीतर सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिकरण के आदेशों के विरुद्ध किसी भी उच्च न्यायालय में अपील करने का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी। NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के सख्त नियमों से बंधा नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
कथन 2 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों (जैसे 'मद्रास बार एसोसिएशन' मामले) में यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पास 'स्वतः संज्ञान' (Suo Motu) लेने की शक्ति नहीं है। NGT किसी भी मामले की सुनवाई तभी कर सकता है जब उसके समक्ष कोई याचिका या आवेदन प्रस्तुत किया जाए।
कथन 3 गलत है: NGT अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार, राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी भी आदेश या निर्णय के विरुद्ध 90 दिनों की अवधि के भीतर सीधे 'उच्चतम न्यायालय' (Supreme Court) में अपील की जा सकती है, उच्च न्यायालयों में नहीं। हालांकि, कथन में दी गई समय सीमा (90 दिन) सही है और उच्च न्यायालयों की वर्जना भी सही है, किंतु NGT के पास स्वतः संज्ञान की शक्ति न होने के कारण कथन 2 गलत हो जाता है, और चूंकि विकल्प 'केवल 1 और 2' में कथन 2 शामिल है, इसलिए यह विकल्प भी अमान्य हो जाता है। अतः केवल कथन 1 ही सही है।
अगला प्रश्न →
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और उनके…
← पिछला प्रश्न
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं'…
Related Questions
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'रामसर अभीसमय' (Ramsar Convention) और भारत में 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रामसर अभीसमय (Ramsar Convention) अंतर-सरकारी संधि है जिसे वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में यूनेस्को (UNESCO) के तत्त्वावधान में अपनाया गया था, और यह दुनिया का एकमात्र ऐसा वैश्विक पर्यावरण सम्मेलन है जो विशेष रूप से किसी विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र यानी आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) पर केंद्रित है।
2. भारत में 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के अंतर्गत केंद्रीय स्तर पर एक 'केंद्रीय आर्द्रभूमि विनियामक प्राधिकरण' (Central Wetlands Regulatory Authority - CWRA) का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होते हैं, और यह प्राधिकरण देश की सभी आर्द्रभूमियों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी अधिसूचनाएं जारी करता है।
3. इन नियमों के तहत आर्द्रभूमियों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक 'राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण' (State Wetland Authority) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित राज्य के पर्यावरण या वन मंत्री करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) के प्रावधानों और लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता लाना, वैश्विक स्तर की विश्वस्तरीय अवसंरचना प्रदान करना तथा वर्ष 2020 से 2025 की अवधि के दौरान कुल 111 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान लगाना था।
2. इस पाइपलाइन के अंतर्गत वित्त पोषण (Financing) की संरचना में केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का ही प्रत्यक्ष योगदान होता है, तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) की भागीदारी के लिए इसमें किसी भी प्रकार के सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
3. NIP के तहत ऊर्जा, सड़क, रेलवे, शहरी विकास और सिंचाई जैसे क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, और इस पहल की प्रगति की निगरानी के लिए वित्त मंत्रालय के अंतर्गत 'अतनु चक्रवर्ती समिति' (Atanu Chakraborty Task Force) की सिफारिशों के आधार पर एक उच्च-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) और 'संघ तथा राज्यों के अधीन लोक सेवा आयोगों' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत संसद को कानून द्वारा 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (IAS), 'भारतीय पुलिस सेवा' (IPS) और 'भारतीय वन सेवा' (IFoS) के अतिरिक्त किसी भी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, बशर्ते कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है।
2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा संविधान के प्रावधानों के अनुसार आयोग के सदस्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उनमें से कम-से-कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति हों जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों।
3. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष या किसी सदस्य को केवल और केवल राष्ट्रपति द्वारा ही उनके पद से हटाया जा सकता है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की गई हो, और हटाने के आधार वही होंगे जो संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) के प्रावधानों और लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है, और यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) कार्यक्रम है जिसके लक्ष्यों को पूरा न करने पर स्थानीय शहरी निकायों पर भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
2. इस कार्यक्रम के तहत मूल रूप से वर्ष 2024 तक देश के गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में PM10 और PM2.5 सांद्रता में वर्ष 2017 के आधार वर्ष की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी लाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. 'गैर-प्राप्ति शहर' वे शहर होते हैं जो पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का लगातार उल्लंघन करते रहे हैं, और इन शहरों के लिए 'कार्रवाई योग्य शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाएं' (City-Specific Clean Air Action Plans) तैयार करना अनिवार्य किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.