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Civil services
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) और 'संघ तथा राज्यों के अधीन लोक सेवा आयोगों' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत संसद को कानून द्वारा 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (IAS), 'भारतीय पुलिस सेवा' (IPS) और 'भारतीय वन सेवा' (IFoS) के अतिरिक्त किसी भी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, बशर्ते कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा संविधान के प्रावधानों के अनुसार आयोग के सदस्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उनमें से कम-से-कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति हों जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों।
- 3. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष या किसी सदस्य को केवल और केवल राष्ट्रपति द्वारा ही उनके पद से हटाया जा सकता है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की गई हो, और हटाने के आधार वही होंगे जो संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS - जिन्हें 1966 में जोड़ा गया) के अतिरिक्त किसी भी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन कर सकती है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 316 के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यद्यपि संविधान यह अपेक्षा करता है कि आयोग के सदस्यों में से "लगभग आधे सदस्य" ऐसे होने चाहिए जिन्होंने भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम दस वर्ष तक पद धारण किया हो, किंतु यह कोई सख्त या अनिवार्य कानूनी बाध्यता (Strict mandatory threshold with absolute percentage) नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक परंपरा/विवेक का मामला है। इसके अलावा, राज्य लोक सेवा आयोग के संदर्भ में भी यही बात लागू होती है।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष या किसी सदस्य की नियुक्ति भले ही संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है (राज्यपाल के पास नहीं)। उन्हें दिवालिया होने, मानसिक अस्वस्थता, नैतिक अधमता के अपराध या साबित कदाचार (Proved misbehavior) के आधार पर उच्चतम न्यायालय की जांच के पश्चात राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) की संरचना, स्वतंत्रता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की निष्कासन प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए जाने वाले अन्य निर्वाचन आयुक्तों का होना अनिवार्य किया गया है।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. संविधान निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं (योग्यता) को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है तथा निर्वाचन से निवृत्त होने वाले निर्वाचन आयुक्तों को सरकार द्वारा भविष्य में किसी भी प्रकार की नियुक्ति (सरकारी या गैर-सरकारी) प्राप्त करने से पूर्णतः प्रतिबंधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) के अंतर्गत विधायी शक्तियों के वितरण तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा किसी राज्य के विधानमंडल को उस राज्य के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति है, किंतु संसद द्वारा बनाई गई कोई भी विधि इस आधार पर अमान्य (Void) नहीं समझी जाएगी कि उसका बहिःक्षेत्रीय प्रवर्तन (Extraterritorial Operation) होता है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची में विधायी शक्तियों को तीन सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) में विभाजित किया गया है, और 'अवशिष्ट शक्तियाँ' (वे विषय जो तीनों सूचियों में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं हैं) संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत विशेष रूप से राज्यों के विधानमंडलों को प्रदान की गई हैं, जो अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई संविधान की पद्धति के अनुरूप है।
3. जब राज्यसभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद को राज्य सूची में प्रगणित किसी भी विषय पर विधि बनानी चाहिए, तब संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत निर्वाचन आयोग और 'अनुच्छेद 324 से 329' के प्रावधानों तथा चुनाव सुधारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य legislatures, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है, और यह एक अखिल भारतीय निकाय है जो केंद्र और राज्य दोनों के लिए समान रूप से कार्य करता है।
2. निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं या सेवा शर्तों को निर्धारित करने के लिए संसद को कानून बनाना ही होगा, राष्ट्रपति अपनी कार्यकारी शक्ति से ऐसा नहीं कर सकते।
3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अनुसार, किसी भी चुनाव क्षेत्र में मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटों की अवधि के दौरान किसी भी चुनाव प्रचार या सार्वजनिक सभा की अनुमति नहीं होती है, ताकि मतदाता बिना किसी बाहरी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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माउंटबेटन योजना (Mountbatten Plan) कब घोषित की गई थी?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत केंद्र के दायित्वों तथा आपातकालीन प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार पर यह संवैधानिक कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में यह व्यवस्था दी गई कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है, और यदि उद्घोषणा असंवैधानिक पाई जाती है, तो न्यायालय भंग की गई राज्य विधानसभा को पुनर्जीवित भी कर सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के तहत जारी राष्ट्रपति शासन की घोषणा के पश्चात, राज्य विधानसभा को या तो तुरंत भंग कर दिया जाता है या उसे निलंबित (Suspended animation) रखा जाता है, और जब तक संसद के दोनों सदनों द्वारा इस घोषणा का अनुमोदन नहीं किया जाता, तब तक राज्य विधानसभा को पूर्णतः भंग नहीं किया जा सकता है।
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