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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) और भारत में स्थित जैव विविधता हॉटस्पॉट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा किया गया था, और किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियाँ हों और उसने अपनी मूल वानस्पतिक आवरण का कम-से-कम 70% या उससे अधिक भाग खो दिया हो।
  2. 2. विश्व स्तर पर वर्तमान में कुल 36 मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, जिनमें से पूर्ण रूप से भारतीय भूभाग के अंतर्गत आने वाले दो सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट 'पश्चिमी घाट' (Western Ghats) और 'सुंडालैंड' (Sundaland) हैं, जबकि पूर्वी हिमालयी क्षेत्र को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।
  3. 3. भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत देश के इन सभी हॉटस्पॉट क्षेत्रों को 'पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र' (Eco-Sensitive Zones - ESZs) के रूप में सीधे और समान रूप से अधिसूचित किया गया है, जिसके तहत खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स द्वारा वर्ष 1988 में दी गई थी। किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए दो मुख्य शर्तें होती हैं: (i) उसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियाँ होनी चाहिए (अर्थात वे दुनिया में अन्यत्र कहीं न पाई जाती हों), और (ii) उसने अपनी मूल प्राथमिक वानस्पतिक आवरण का कम-से-कम 70% भाग नष्ट कर दिया हो (यानी उसने गंभीर रूप से आवास हानि का सामना किया हो)। कथन 2 गलत है: विश्व भर में कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं। भारत में चार ऐसे क्षेत्र हैं जो इन हॉटस्पॉट के अंतर्गत आते हैं या आंशिक रूप से स्थित हैं: (1) पश्चिमी घाट/श्रीलंका, (2) पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas), (3) इंडो-बर्मा क्षेत्र (Indo-Burma Region), और (4) सुंडालैंड (Sundaland - जिसका कुछ हिस्सा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक फैला है)। केवल पश्चिमी घाट और सुंडालैंड ही नहीं, बल्कि पूर्वी हिमालय और इंडो-बर्मा भी भारत से संबंधित हैं। कथन 3 गलत है: जैव विविधता हॉटस्पॉट क्षेत्रों को स्वतः या सीधे तौर पर जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत 'पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र' (ESZs) के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता है। ESZs का निर्धारण पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत विशिष्ट राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्रों के लिए अलग से किया जाता है, न कि संपूर्ण हॉटस्पॉट क्षेत्रों के लिए एक समान रूप से।
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