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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का ऐसा प्रयास है, जिसके तहत देश के सभी जिलों को शामिल करते हुए वर्ष 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5) सांद्रता में 20-30% की कमी लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी करने का लक्ष्य कर दिया गया।
  2. 2. वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत गठित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वे वायु प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों को 'नियंत्रित क्षेत्र' (Air Pollution Control Area) घोषित कर सकें और औद्योगिक इकाइयों द्वारा उत्सर्जित होने वाले प्रदूषकों के लिए मानक निर्धारित कर सकें।
  3. 3. NCAP के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वित्तीय सहायता और निष्पादन आधारित अनुदान (Performance-based grants) केवल दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले (Million-plus cities) उन 42 शहरी स्थानीय निकायों को ही प्रदान किए जाते हैं जो वित्त आयोग की संस्तुतियों के दायरे में आते हैं, और इसके लिए राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों को इस कार्यक्रम के तहत पूरी तरह से बाहर रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि NCAP के तहत शुरुआत में देश के केवल 102 (बाद में बढ़ाकर 131) गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment cities) को लक्षित किया गया था, न कि देश के 'सभी जिलों' को। हालांकि, लक्ष्यों को संशोधित कर 2026 तक 40% कमी का लक्ष्य किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19 के तहत SPCB केंद्रीय बोर्ड के परामर्श से किसी भी क्षेत्र को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि NCAP के तहत वित्त पोषण केवल मिलियन-प्लस शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गैर-प्राप्ति शहरों के लिए भी केंद्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न वित्तीय प्रावधान किए जाते हैं, और इसे पूरी तरह से वित्त आयोग के अनुदान तक सीमित नहीं किया गया है।
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