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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों (Legislative Relations) तथा 'अनुच्छेद 249' और 'अनुच्छेद 252' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
  2. 2. अनुच्छेद 252 के प्रावधान के तहत यदि दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल यह संकल्प पारित करें कि उन राज्यों के लिए राज्य सूची के विषयों में से किसी विषय पर संसद द्वारा विधि बनाया जाना वांछनीय है, तो संसद उन राज्यों के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है, और ऐसा अधिनियमित कानून केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होगा जिन्होंने इसके लिए अनुरोध किया है या बाद में इसे अंगीकृत किया है।
  3. 3. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत संसद द्वारा राज्य सूची के किसी विषय पर बनाए गए कानून की अधिकतम अवधि समाप्त होने के पश्चात भी वह कानून अनिश्चित काल तक तब तक लागू रहता है जब तक कि संबंधित राज्य विधानमंडल उसे विधिवत रूप से निरस्त नहीं कर देते।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 अशुद्ध है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्य सभा द्वारा पारित संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, न कि पाँच वर्षों के लिए (हालांकि इसे आवश्यकतानुसार बार-बार बढ़ाया जा सकता है, किंतु एक बार में अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होती)। कथन 2 पूरी तरह से सही है; अनुच्छेद 252 के अनुसार यदि दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल प्रस्ताव पारित कर संसद से अनुरोध करें, तो संसद राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है और वह कानून केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होता है। कथन 3 अशुद्ध है क्योंकि अनुच्छेद 249 के अधीन संसद द्वारा बनाया गया कानून संकल्प के प्रवर्तन से बाहर होने के पश्चात् छह महीने की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाता है, न कि अनिश्चित काल तक लागू रहता। अतः केवल कथन 2 सही है।
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