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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'ग्लोबल साउथ' (Global South) देशों के बीच वित्तीय सहयोग और 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (New Development Bank - NDB) के प्रावधानों तथा कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना ब्रिक्स (BRICS) देशों द्वारा की गई थी, और इसके आलेख (Articles of Agreement) के अनुसार इस बैंक की सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खुली है, जिससे यह पारंपरिक पश्चिमी नेतृत्व वाले वित्तीय संस्थानों से भिन्न है।
  2. 2. NDB के प्रत्येक संस्थापक सदस्य देश के पास समान मतदान अधिकार (Equal Voting Power) हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की तर्ज पर सदस्य देशों के वित्तीय कोटे (Quotas) या शेयर पूंजी के अनुपात पर आधारित नहीं है।
  3. 3. बैंक के नियमों के अनुसार, NDB अपनी कुल ऋण स्वीकृति का एक निश्चित न्यूनतम प्रतिशत भाग विकसित देशों की हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए आरक्षित रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), जिसे पहले ब्रिक्स विकास बैंक के रूप में जाना जाता था, की स्थापना ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) द्वारा की गई थी। इसके आलेख के अनुसार, NDB की सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खुली है, हालांकि ब्रिक्स देशों की प्रारंभिक शेयरधारिता एक सीमा से नीचे नहीं जा सकती। कथन 2 सही है: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के विपरीत, जहाँ मतदान अधिकार वित्तीय कोटे या पूंजी योगदान के अनुपात में होते हैं (यानी 'एक डॉलर, एक वोट' की प्रणाली), NDB में प्रत्येक संस्थापक सदस्य देश के पास समान मतदान अधिकार है, जिससे विकासशील देशों को समान निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। कथन 3 गलत है: NDB का मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों जुटाना है। यह बैंक विकसित देशों की परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनतम प्रतिशत आरक्षित नहीं रखता है, बल्कि इसका फोकस मुख्य रूप से विकासशील और उभरते बाजारों पर है।
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