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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के बीच के अंतर और इसके महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ग्रीन जीडीपी (Green GDP) पारंपरिक जीडीपी की तुलना में अधिक व्यापक माप है, क्योंकि यह आर्थिक उत्पादन के मौद्रिक मूल्य की गणना करते समय प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास (Depletion of natural resources) और पर्यावरण को पहुँचने वाले नुकसान (Environmental degradation) की लागत को भी ध्यान में रखती है।
- 2. भारत में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा समय-समय पर पूर्ण रूप से आधिकारिक ग्रीन जीडीपी के आंकड़े नियमित रूप से प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Accounting) में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाता है।
- 3. यद्यपि पारंपरिक जीडीपी किसी देश की आर्थिक वृद्धि (Economic growth) का सटीक आकलन करती है, किंतु यह मानव कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता की वास्तविक स्थिति को दर्शाने में विफल रहती है, जिसे दूर करने के लिए ग्रीन जीडीपी जैसे सूचकांकों का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: ग्रीन जीडीपी (Green GDP) पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद का एक संशोधित रूप है, जो आर्थिक विकास के कारण होने वाले पर्यावरणीय क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास की लागत को घटाकर निकाला जाता है।
कथन 2 गलत है: भारत में ग्रीन जीडीपी या पर्यावरण-लेखांकन (Environmental Accounting) को लेकर कई प्रयास और समितियाँ (जैसे पार्थ दासगुप्ता और आर.के. पचौरी समिति) गठित की गई हैं, तथा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा इस दिशा में कार्य किया जा रहा है, किंतु अभी तक भारत में नियमित रूप से आधिकारिक 'ग्रीन जीडीपी' के आंकड़े जीडीपी के वैकल्पिक मानक के रूप में राष्ट्रीय आय लेखांकन में पूरी तरह से अनिवार्य रूप से हर साल प्रकाशित नहीं किए जाते हैं।
कथन 3 सही है: पारंपरिक जीडीपी केवल वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य को मापती है, यह इस बात को ध्यान में नहीं रखती कि वह विकास किस कीमत पर हुआ है (जैसे प्रदूषण, वनों की कटाई, भूजल का दोहन आदि)। इसलिए यह पर्यावरणीय स्थिरता और वास्तविक मानवीय कल्याण को नहीं दर्शाती है, जिसे ग्रीन जीडीपी संबोधित करती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और उसके अधिकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही होते हैं।
2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से किसी भी समय हटाया जा सकता है, क्योंकि संविधान उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान विधिक सुरक्षा या महाभियोग जैसी प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practices) की परिभाषा में केवल जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना ही शामिल है, और यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के निजी जीवन या उसके व्यक्तिगत चरित्र से जुड़े पहलुओं पर बयान देता है, तो वह इस धारा के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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