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Indian Polity
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भारत में पंचायती राज का शुभारंभ कब हुआ?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
2 अक्टूबर 1959, राजस्थान से।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संरचनात्मक प्रावधानों, वित्त आयोग और लेखा परीक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या बीस लाख से अधिक नहीं है, उस राज्य के लिए मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करना अनिवार्य नहीं है।
2. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के तहत राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर एक राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन किया जाएगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को दिए जाने वाले अनुदानों के सिद्धांतों का निर्धारण करेगा।
3. अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, और ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण और अंतिम विधायी शक्ति पंचायतों को स्वयं प्राप्त है, जिसके लिए राज्य विधानमंडल की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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'संविधान की प्रस्तावना' (Preamble) में किस संशोधन द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और विदेशी भू-भाग के अधिग्रहण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के तहत भारत के राज्यक्षेत्र को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है—राज्यों के राज्यक्षेत्र, संघ राज्यक्षेत्र और ऐसे अन्य राज्यक्षेत्र जो अर्जित किए जा सकें।
2. अनुच्छेद 2 संसद को किसी विदेशी भू-भाग या नए राज्य को भारतीय संघ में शामिल करने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को केवल आंतरिक राज्यों की सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरुबारी यूनियन मामले' (1960) में यह स्पष्ट किया गया था कि भारतीय संघ के किसी भी भू-भाग (क्षेत्र) को किसी अन्य देश को सौंपने के लिए केवल संसद द्वारा साधारण बहुमत से विधि पारित करना पर्याप्त है, और इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह उपबंधित किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा संपूर्ण भारत देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग में एक साथ लागू की जा सकती है, तथा देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग आधारों पर एक साथ एकाधिक उद्घोषणाएँ भी प्रख्यापित की जा सकती हैं।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर ही की जा सकती है, तथा मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति (Written Recommendation) प्राप्त होने के पश्चात् ही राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा कर सकता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा करने वाले अनुमोदन प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसकी घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, जिसे बाद में 44वें संशोधन द्वारा दो महीने से घटाकर एक महीना किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इसका दायरा सार्वजनिक विधि के उल्लंघन तक सीमित है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट अधिकारिता प्राप्त है, जिससे उच्च न्यायालयों की रिट क्षेत्राधिकारिता का दायरा उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक है।
2. अनुच्छेद 33 के तहत संसद को यह शक्ति दी गई है कि वह सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कार्मिकों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सके या उन्हें समाप्त कर सके, किंतु इस प्रकार के नियम या कानून बनाने की अनन्य शक्ति केवल संसद के पास है; राज्य के विधानमंडलों को इस संबंध में कोई विधाई शक्ति प्राप्त नहीं है।
3. अनुच्छेद 34 के अंतर्गत जब देश में या किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ (सैन्य शासन) प्रवृत्त होता है, तो संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी सरकारी कर्मचारी या व्यक्ति द्वारा मार्शल लॉ के दौरान शांति बनाए रखने या पुनर्स्थापित करने के लिए किए गए किसी भी कार्य को वैध ठहराने (Indemnity) के लिए संसद द्वारा कानून बना सकती है, और इस प्रकार के क्षतिपूर्ति अधिनियम (Act of Indemnity) को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसने मूल अधिकारों का उल्लंघन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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