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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' और 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों तथा आपातकाल के दौरान उनके निलंबन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 20 के तहत किसी भी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए तब तक दोषी नहीं ठहराया जाएगा जब तक कि उसने ऐसा कार्य करने के समय लागू किसी कानून का उल्लंघन न किया हो (कार्योत्तर आपराधिक विधि से संरक्षण), और इसके अंतर्गत दोहरे दंड (Double Jeopardy) तथा आत्म-अभिशंसन (Self-Incrimination) के विरुद्ध भी संरक्षण प्रदान किया गया है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'पुट्टास्वामी निर्णय (2017)' में यह स्पष्ट किया गया है कि 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न अंग है, और यह पूर्ण (Absolute) अधिकार है जिस पर राज्य द्वारा किसी भी परिस्थिति में कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के दौरान, राष्ट्रपति को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों सहित संविधान के सभी भाग III के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत तीन प्रकार के सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए हैं: (i) कार्योत्तर आपराधिक विधि से संरक्षण (Ex-post facto law), (ii) दोहरे दंड से संरक्षण (Double jeopardy), और (iii) आत्म-अभिशंसन से संरक्षण (Self-incrimination)। यह संसद द्वारा भी छीना नहीं जा सकता।
कथन 2 गलत है: 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) निश्चित रूप से अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है, लेकिन यह एक 'पूर्ण' (Absolute) अधिकार नहीं है। इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और अपराध की रोकथाम जैसे वैध राज्य हितों के आधार पर उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं।
कथन 3 गलत है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद से यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है। अतः केवल कथन 1 सही है।
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अटॉनी जनरल ऑफ इंडिया' (भारत के महान्यायवादी - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (एडवोकेट जनरल - अनुच्छेद 165) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह (Qualified) हो, और वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार होने के बावजूद मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. राज्य के महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इसके लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह हो, तथा उसे राज्य विधानमंडल के सदनों (या विधान परिषद वाले राज्यों में दोनों सदनों) की बैठकों में भाग लेने, बोलने और बिना किसी मतदान के अधिकार के कार्यवाहियों में हिस्सा लेने की शक्ति प्राप्त होती है।
3. 'सोली सोराबजी बनाम भारत संघ' या महान्यायवादी के कार्यकाल से संबंधित अन्य संवैधानिक परंपराओं के अनुसार, महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता दोनों का कार्यकाल संविधान द्वारा निश्चित (Fixed Term - जैसे 5 वर्ष) होता है, और इन्हें हटाने की प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार होती है जैसी उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए की गई थी, जिसके तहत यह दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के कठोर नियमों से पूरी तरह बंधा हुआ है।
2. NGT के अध्यक्ष (Chairperson) के लिए यह अनिवार्य है कि वह या तो भारत के सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश हो, या किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
3. यह अधिकरण पर्यावरण से संबंधित मामलों में सिविल कोर्ट की तुलना में विशेषीकृत संस्था है, तथा इसके निर्णयों या आदेशों से व्यथित व्यक्ति NGT के आदेश के खिलाफ सीधे 90 दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालयों (High Courts) के पास इसके आदेशों के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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तीनकठिया प्रणाली का संबंध किस आंदोलन से था?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1931 के कराची अधिवेशन' (Karachi Session) और पारित प्रस्तावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल द्वारा की गई थी, और इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का समर्थन करते हुए अपनी मुहर लगाई थी।
2. इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और आर्थिक नीति' (Fundamental Rights and National Economic Programme) पर एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया था, जिसके प्रारूप को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किया गया था।
3. कराची अधिवेशन में ही महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध रूप से यह घोषणा की थी कि "गांधी मर सकता है, परंतु गांधीवाद हमेशा जीवित रहेगा", और इसी सम्मेलन में उन्होंने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने से पूर्ण रूप से इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) की प्रक्रिया, उसके प्रावधानों और उसकी सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल 'साधारण विधेयकों' (Ordinary Bills) और 'वित्तीय विधेयकों (Financial Bills - श्रेणी I और II)' के मामलों में ही लागू होता है, और इसे संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) तथा धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में कभी भी आहूत नहीं किया जा सकता है।
2. यदि किसी विधेयक को एक सदन द्वारा पारित किए जाने के बाद दूसरे सदन को भेजा जाता है और दूसरा सदन विधेयक को अस्वीकार कर देता है, या संशोधनों पर असहमत होता है, या दूसरे सदन द्वारा विधेयक पारित किए बिना 'छह महीने' से अधिक की अवधि बीत जाती है, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय को संसूचित करने के लिए अधिसूचना जारी कर सकता है।
3. लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, और यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) उसकी अध्यक्षता करता है, किंतु यदि दोनों ही अनुपस्थित हों, तो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सर्वोच्च न्यायालय का कोई सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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