BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
5 views

भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' (Wild Life (Protection) Act, 1972) के अंतर्गत विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों और संस्थागत निकायों के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य की सरकार को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी क्षेत्र को, जो उसके स्वामित्व का है या किसी अभ्यारण्य की सीमा के भीतर है, पारिस्थितिकीय, जीवजंतु, वनस्पति, भू-आकृतिक या प्राणीशास्त्रीय महत्व के कारण 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Park) के रूप में घोषित कर सकती है, बशर्ते इसके लिए राज्य विधानमंडल का अनुमोदन अनिवार्य हो।
  2. 2. वर्ष 2002 के संशोधन अधिनियम द्वारा इस अधिनियम में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) के गठन का प्रावधान किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, और इस बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
  3. 3. इस अधिनियम के तहत स्थापित 'केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण' (Central Zoo Authority - CZA) देश भर के सभी चिड़ियाघरों के रख-रखाव और प्रबंधन का विनियमन करता है, और इसे वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकने तथा लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए कैप्टिव प्रजनन (Captive Breeding) कार्यक्रम आयोजित करने की सांविधिक शक्ति प्राप्त है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 35 के अनुसार, किसी राज्य की सरकार किसी भी क्षेत्र (जो अभ्यारण्य हो सकता है या नहीं भी) को उसके पारिस्थितिकीय, जीवजंतु, वनस्पति, भू-आकृतिक या प्राणीशास्त्रीय महत्व के कारण 'राष्ट्रीय उद्यान' के रूप में घोषित कर सकती है। हालांकि, इसके लिए राज्य विधानमंडल के पूर्व अनुमोदन की कोई संवैधानिक या कानूनी अनिवार्यता नहीं होती है, बल्कि यह राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से किया जाता है। साथ ही, राष्ट्रीय उद्यान की घोषणा के बाद उस क्षेत्र में मानवाधिकारों और अधिकारों को समाप्त करने की एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया होती है। कथन 2 सही है: वर्ष 2002 के संशोधन अधिनियम के द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में धारा 5A को जोड़कर 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) के गठन का प्रावधान किया गया। इस उच्च-स्तरीय निकाय के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं में परिवर्तन या उसके भीतर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। कथन 3 सही है: इस अधिनियम की धारा 38A के तहत 'केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण' (CZA) का गठन किया गया है, जिसका मुख्य कार्य देश के सभी चिड़ियाघरों को मान्यता देना, उनके लिए मानक और दिशा-निर्देश निर्धारित करना, वन्यजीवों के स्वास्थ्य और पशुचिकित्सा देखभाल का ध्यान रखना, तथा लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए कैप्टिव प्रजनन कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और उनका समन्वय करना है।
Share:

Related Questions

भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का गठन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों को लागू करने के लिए किया गया था, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है। 2. यह अधिनियम भारत के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और स्थानीय समुदायों के साथ इन संसाधनों के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायसंगत व निष्पक्ष बंटवारे (Access and Benefit Sharing - ABS) को विनियमित करने का प्रावधान करता है। 3. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित त्रि-स्तरीय संरचना के अंतर्गत, राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर पंचायतों द्वारा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMC) गठित की जाती हैं, जो स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के प्रलेखन (Documentation) के लिए 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्यसभा के कितने सदस्य प्रति दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (Article 32) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की 'रिट अधिकारिता' (Writ Jurisdiction) और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता के बीच तुलनात्मक अंतर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँ सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, वहीं उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य कानूनी या सामान्य उद्देश्यों (Any Other Purpose) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति रखते हैं। 2. सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र संपूर्ण भारत (Territorial Jurisdiction across India) पर लागू होता है, जबकि किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सामान्यतः केवल उस राज्य या प्रादेशिक क्षेत्राधिकार तक ही सीमित होता है जिसके अंतर्गत वह उच्च न्यायालय कार्यरत है। 3. अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिट जारी करने से अपनी 'अधिकारिता के अभाव' (Want of jurisdiction) के आधार पर मना कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों के लिए रिट जारी करना एक अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्य है जिसे वे अस्वीकार नहीं कर सकते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'सेंट्रल जू अथॉरिटी' (Central Zoo Authority - CZA) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' [Wildlife (Protection) Act, 1972] के विधिक और संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सेंट्रल जू अथॉरिटी' (CZA) का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत वर्ष 1992 में एक सांविधिक (Statutory) निकाय के रूप में किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी चिड़ियाघरों (Zoos) के कामकाज को विनियमित करना, न्यूनतम मानक स्थापित करना और वन्यजीवों के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। 2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, देश के भीतर किसी भी नए चिड़ियाघर की स्थापना या संचालन के लिए 'केंद्रीय जू अथॉरिटी' (CZA) से पूर्व मान्यता (Recognition) प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, और इस प्राधिकरण को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि कोई चिड़ियाघर निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है, तो वह उसकी मान्यता रद्द कर सकता है। 3. वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के द्वारा अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत 'केंद्रीय जू अथॉरिटी' (CZA) के दायरे से देश के सभी प्रकार के बचाव केंद्रों (Rescue Centres) और सर्कसों में रखे गए जंगली जानवरों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि अब इन संस्थानों का नियंत्रण पूरी तरह से राज्य सरकारों के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) के विवेकाधीन अधिकारों के अंतर्गत आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - अनुच्छेद 352 से 360) तथा '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संशोधन द्वारा बदला गया। 2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता को अनुमोदित करने वाले प्रत्येक संकल्प को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा एक मास (30 दिन) के भीतर पारित किया जाना अनिवार्य किया गया है, और यह प्रावधान भी मूल संविधान में 2 माह के स्थान पर 44वें संशोधन द्वारा कड़ा किया गया था। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को इस आधार पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा गया है कि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है, और आपातकाल लगाने के पीछे के राजनीतिक या तथ्यात्मक कारणों की जाँच अदालतें नहीं कर सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.