BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
4 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 200' के अंतर्गत राज्यपाल की किसी विधेयक पर अनुमति देने, रोकने या राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखने की शक्ति तथा इससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत जब राज्य के विधानमंडल द्वारा कोई विधेयक पारित कर राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह उस पर अपनी अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है, या विधेयक को (धन विधेयक को छोड़कर) पुनर्विचार के लिए राज्य विधानमंडल को वापस भेज सकता है।
  2. 2. राज्यपाल के पास यह संवैधानिक विवेकाधिकार है कि वह किसी भी साधारण विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित (Reserve) कर सकता है, और संविधान में ऐसी कोई समय-सीमा या मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं जिसके तहत राज्यपाल के लिए यह अनिवार्य हो कि वह इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह से ही करे या इसे एक निश्चित अवधि के भीतर वापस करे।
  3. 3. 'संसदीय लोकतंत्र' और 'संघवाद' (Federalism) के सिद्धांतों के मद्देनजर, उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल द्वारा विधेयक पर अनुमति रोकने या उसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करने का निर्णय पूरी तरह से उसकी व्यक्तिगत और अनियंत्रित राजनीतिक इच्छा पर आधारित होता है, जिसकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के अनुसार, जब राज्य के विधानमंडल द्वारा कोई विधेयक पारित किया जाता है और राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल या तो अनुमति देता है, अनुमति रोकता है, विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखता है, या (धन विधेयक को छोड़कर) सदन को पुनर्विचार के लिए संदेश के साथ वापस भेज सकता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास यह विवेकाधीन शक्ति है कि वह किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित कर सके। संविधान में इसके प्रयोग के लिए कोई निश्चित समय-सीमा या कड़े मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं। कथन 3 गलत है: उच्चतम न्यायालय ने 'नबाम रेबिया बनाम डिप्टी स्पीकर' और हालिया निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि राज्यपाल की शक्तियां असीमित या अनियंत्रित नहीं हैं। यदि राज्यपाल किसी विधेयक को अनिश्चितकाल के लिए रोक कर रखता है या मंत्रिपरिषद की सलाह के विरुद्ध मनमाने ढंग से कार्य करता है, तो उसकी ऐसी कार्रवाइयों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
Share:

Related Questions

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का उल्लेख किस अनुच्छेद में है? गौतम बुद्ध की मृत्यु (महापरिनिर्वाण) किस स्थान पर हुई थी? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 110' के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) की परिभाषा और उसकी विधायी प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे प्रावधान हों जो कर लगाने, भारत सरकार द्वारा उधार लेने, संचित निधि या आकस्मिकता निधि से धन जमा करने या निकालने से संबंधित हों, तथा यदि किसी विधेयक में धन विधेयक के साथ-साथ अन्य विषय भी शामिल हैं, तो उसे लोकसभा अध्यक्ष के प्रमाणन के बावजूद संयुक्त बैठक (Joint Sitting) के माध्यम से पारित किया जा सकता है। 2. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, और इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति (Prior Recommendation) अनिवार्य होती है, जबकि राज्यसभा के पास इस विधेयक को अस्वीकार करने या इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं होती है, वह अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए ही इसे अपने पास रोक सकती है। 3. लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात जब कोई धन विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है और राज्यसभा 14 दिनों के भीतर बिना किसी सिफारिश के उसे वापस कर देती है या कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो उस विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, भले ही उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर न हुए हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? पंचायती राज संस्थाओं का प्रावधान संविधान की किस अनुसूची में है? भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक सांविधिक, स्वायत्त निकाय है जो देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता से जुड़े लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करने के लिए कार्य करता है। 2. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग करने वाले किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय पंजीकृत संस्था/कंपनी के लिए NBA से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, भले ही वे जैव संसाधनों को देश के भीतर ही एकत्रित कर रहे हों। 3. यह अधिनियम त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढाँचे का प्रावधान करता है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) और स्थानीय स्तर पर पंचायत तथा नगर निकायों के स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs) शामिल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.