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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' और 'अनुच्छेद 217' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति, 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) तथा इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के मूल पाठ में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में 'कॉलेजियम' शब्द का उल्लेख नहीं था, और यह प्रणाली वर्ष 1993 में 'द्वितीय न्यायाधीश मामला (Supreme Court Advocates-on-Record Association बनाम भारत संघ)' के न्यायिक निर्णय के माध्यम से अस्तित्व में आई, जिसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और उनके चार वरिष्ठतम सहयोगियों का कॉलेजियम न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण पर अंतिम निर्णय लेता है।
  2. 2. 'तृतीय न्यायाधीश मामला (1998)' में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए राष्ट्रपति के परामर्श (Article 143 के अंतर्गत) के उत्तर में यह स्पष्ट किया गया कि कॉलेजियम में CJI के अतिरिक्त केवल दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों का होना अनिवार्य है, और यदि कॉलेजियम के दो न्यायाधीश भी किसी नाम पर लिखित आपत्ति जता देते हैं, तो CJI उस नाम की सिफारिश सरकार को नहीं भेज सकते हैं।
  3. 3. 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 और 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014' को 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, क्योंकि न्यायालय ने यह माना कि यह आयोग न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of the Judiciary) का उल्लंघन करता है जो संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के मूल अनुच्छेद 124(2) में 'कॉलेजियम प्रणाली' का कोई उल्लेख नहीं था, इसे 'द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)' के निर्णय द्वारा स्थापित किया गया, जिसमें CJI और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों के परामर्श को प्राथमिकता दी गई। कथन 2 गलत है: 'तृतीय न्यायाधीश मामला (1998)' के तहत सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के लिए कॉलेजियम की संरचना में CJI और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश (यानी कुल पाँच सदस्य) शामिल होने चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि कॉलेजियम के दो (न कि केवल दो, बल्कि बहुमत के विपरीत) सदस्य भी किसी नाम पर आपत्ति जताते हैं, तो CJI सरकार को वह नाम संसूचित नहीं कर सकते। कथन 3 सही है: 99वें संविधान संशोधन और NJAC अधिनियम, 2014 को 'चौथे न्यायाधीश मामले (2015)' में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालने और संविधान के मूल ढांचे के उल्लंघन के आधार पर शून्य और असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
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