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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'विशेष बहसों', विधायी विशेषाधिकारों और संसद सदस्यों की स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 और अनुच्छेद 194 के अंतर्गत क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को सदन के भीतर कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के लिए देश के किसी भी न्यायालय में कानूनी कार्रवाई से पूर्ण मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह उन्मुक्ति उनके कार्यकाल के समाप्त होने के बाद भी बनी रहती है।
- 2. 'पी. वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई (1998)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि सांसदों को संसद के भीतर रिश्वत लेने के बावजूद किसी प्रस्ताव के पक्ष में या विपक्ष में मतदान करने के लिए आपराधिक अभियोजन से छूट (Immunity) प्राप्त है, क्योंकि यह मामला प्रत्यक्ष रूप से विधायी कार्यों से जुड़ा हुआ है।
- 3. 'सता कृष्णमूर्ति बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2024)' मामले में भारत के उच्चतम न्यायालय की सात सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने पूर्ववर्ती 1998 के फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 105 और 194 के तहत प्राप्त विधायी विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा (Immunity) किसी भी जनप्रतिनिधि को सदन के भीतर रिश्वत लेने और उसके बदले वोट या भाषण देने के आपराधिक कृत्य से बचाने के लिए नहीं बनाई गई है, क्योंकि यह संवैधानिक नैतिकता और लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: यद्यपि अनुच्छेद 105(2) और 194(2) संसद और विधानमंडलों के सदस्यों को सदन के भीतर कही गई बातों या मतों के लिए न्यायालयों में पूर्ण प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं, किंतु यह प्रतिरक्षा केवल सदन के अंदर की गई कार्यवाहियों तक सीमित है और कार्यकाल समाप्त होने के बाद यदि कोई संविधिक अपराध या भ्रष्टाचार का ऐसा मामला है जो विधायी प्रक्रिया से बाहर है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, मूल प्रतिरक्षा केवल भाषण और मतदान तक है, असीमित आपराधिक कृत्यों तक नहीं।
कथन 2 गलत है: वर्ष 1998 के 'पी. वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई' मामले में बहुमत के निर्णय द्वारा यह माना गया था कि रिश्वत लेकर वोट देने वाले सांसदों को संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत आपराधिक अभियोजन से छूट प्राप्त है। किंतु यह निर्णय अत्यधिक विवादास्पद रहा और इसे हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बदल दिया गया है।
कथन 3 सही है: मार्च 2024 में 'सता कृष्णमूर्ति बनाम आंध्र प्रदेश राज्य' मामले में उच्चतम न्यायालय की 7 सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से वर्ष 1998 के फैसले को खारिज करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय दिया कि रिश्वतखोरी को विधायी विशेषाधिकारों के अंतर्गत संरक्षण नहीं मिल सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 105 और 194 सांसदों को अपने कर्तव्यों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करने के लिए हैं, न कि भ्रष्टाचार को वैध बनाने के लिए।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 72) के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) में एक प्रमुख अंतर यह है कि राष्ट्रपति उन सभी मामलों में मृत्युदंड को क्षमा या निलंबित कर सकता है जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, जबकि राज्यपाल को किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान (Pardon) देने की शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति न्यायपालिका की समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर है, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग करने के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह से पूरी तरह स्वतंत्र है, तथा वह किसी भी कारण से अपनी पसंद का निर्णय ले सकता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिस्थापित विधि के अनुसार, दया याचिका (Mercy Petition) पर निर्णय लेने में अत्यधिक और अस्पष्टीकृत देरी (Unexplained delay) को आधार बनाकर राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकृत किए गए मृत्युदंड के दंडादेश को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) और इसके समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण होता है, जिसके अवशोषण से महासागरों के pH मान में वृद्धि होती है और वे अधिक क्षारीय हो जाते हैं।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुलती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक एसिड बनाती है, जो हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता को बढ़ाता है और कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता को कम कर देता है।
3. कार्बोनेट आयनों की कमी से प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), मोलस्क (Molluscs) और फोरामिनीफेरा जैसे जीवों के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के कंकाल और कवच का निर्माण करना कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (National Clean Air Programme - NCAP) तथा भारत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया NCAP देश का पहला ऐसा राष्ट्रीय ढांचा है, जिसका उद्देश्य देश के चुनिंदा गैर-प्राप्ति शहरों (Non-Attainment Cities) में वायु प्रदूषण (PM10 और PM2.5 सांद्रता) को एक निश्चित समयावधि में कम करना है।
2. इस कार्यक्रम के तहत मूल लक्ष्य यह निर्धारित किया गया था कि वर्ष 2017 के आधार वर्ष (Base Year) की तुलना में वर्ष 2024 तक इन लक्षित शहरों में पार्टिकुलेट मैटर (PM) के सांद्रण में 20% से 30% तक की कमी लाई जाए, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी करने का लक्ष्य कर दिया गया है।
3. NCAP के अंतर्गत शहरों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पूरी तरह से केंद्र सरकार के केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) के माध्यम से प्रदान की जाती है, जिसमें राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों के लिए किसी भी प्रकार के सह-वित्तपोषण या प्रदर्शन-आधारित अनुदान का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग की स्थापना एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में की गई थी, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं, और इन सभी की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से की जाती है।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्राप्त है, किंतु पंचायतों और नगरपालिकाओं (स्थानीय निकायों) के चुनावों का अधीक्षण और संचालन करने का उत्तरदायित्व निर्वाचन आयोग का न होकर संबंधित राज्यों के 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) का होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और जलवायु वित्तपोषण के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बांड ऐसे निश्चित आय वाले साधन (Fixed-income instruments) हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और कम कार्बन उत्सर्जन वाली हरित परियोजनाओं के वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण के लिए किया जाता है।
2. अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बाजार संघ (ICMA) द्वारा जारी 'हरित बांड सिद्धांत' (Green Bond Principles - GBP) अनिवार्य रूप से एक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक ढांचा है, जिसका पालन करना सभी संप्रभु (Sovereign) हरित बांड जारीकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य है।
3. भारत सरकार द्वारा जारी किए गए संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) से प्राप्त आय को भारत के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग देश के सामान्य राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए किसी भी सरकारी उद्देश्य हेतु किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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