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Indian Polity
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भारत का संविधान कैसी नागरिकता प्रदान करता है?

Detailed Explanation

भारत एकल नागरिकता देता है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों (जैसे 38वें, 42वें और 44वें संविधान संशोधन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा जाएगा। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई कि वह संपूर्ण देश में एक साथ अथवा देश के किसी विशिष्ट भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है (क्षेत्रीय आपातकाल का प्रावधान)। 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह को लिखित रूप में होना अनिवार्य बनाया गया तथा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) से पारित करना होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री के उत्तरदायित्व तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कामकाज से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए गठित निर्वाचक मंडल (Electoral College) में संसद के दोनों सदनों के सभी निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं, तथा इसमें राज्यों की विधानसभाओं या विधान परिषदों के सदस्यों को कोई स्थान नहीं दिया जाता है। 2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधान के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, भले ही नीतिगत मामलों पर राज्यसभा का समर्थन प्राप्त हो। 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों को राष्ट्रपति को संसूचित करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर जानकारी मांगते हैं जिस पर किसी मंत्री ने निर्णय ले लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो प्रधानमंत्री ऐसी सूचना देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होते हैं। भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, हटाने की प्रक्रिया तथा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित ऐसे संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है जिससे लोकसभा सहमत हो, और इस प्रक्रिया के लिए राष्ट्रपति की तरह महाभियोग (Impeachment) के औपचारिक प्रावधान का पालन करना संविधान द्वारा अनिवार्य नहीं किया गया है। 3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है, और प्रधानमंत्री के त्यागपत्र देने या उसकी मृत्यु हो जाने पर पूरी मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में यह प्रतीत हो कि ऐसी परिषद् की स्थापना से राज्यों के बीच अथवा संघ और राज्यों के कुछ या सभी राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और उन पर विचार-विमर्श में सहायता मिलेगी, तो वह एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है। 2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका गठन संविधान के प्रारंभ के साथ ही वर्ष 1950 में कर दिया गया था, और प्रधानमंत्री इस परिषद् के पदेन अध्यक्ष होते हैं। 3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission, 1983-88) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा पहली बार अंतर-राज्यीय परिषद् की औपचारिक स्थापना की गई थी, और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-Q के तहत प्रत्येक राज्य में तीन प्रकार की नगरपालिकाओं के गठन का प्रावधान किया गया—ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित होने वाले क्षेत्रों के लिए नगर पंचायत, छोटे शहरी क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद, और बड़े शहरी क्षेत्र के लिए नगर निगम। 2. संविधान की 12वीं अनुसूची में नगरपालिकाओं की विधाई शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 18 विषय सूचियों का उल्लेख किया गया है, और इन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति राज्य विधानमंडल में निहित है, न कि अनिवार्य रूप से नगरपालिकाओं को सौंपे जाने की संवैधानिक बाध्यता है। 3. 74वें संविधान संशोधन के तहत प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन अनिवार्य किया गया है, किंतु यह प्रावधान केवल उन नगरपालिकाओं पर लागू होता है जिनकी कुल जनसंख्या 3 लाख या उससे अधिक है।
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