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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान में उल्लिखित 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत के संविधान में 'न्यायिक समीक्षा' शब्दावली को सीधे तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 136, 142 और 226 जैसे विभिन्न प्रावधान न्यायपालिका को विधायी और कार्यकारी कार्यों की संवैधानिकता का परीक्षण करने की प्रत्यक्ष शक्ति प्रदान करते हैं।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में प्रतिपादित 'मूल संरचना का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) केवल संसद द्वारा किए जाने वाले संविधान संशोधनों पर ही लागू होता है, और इसके दायरे में कार्यपालिका द्वारा जारी किए जाने वाले कार्यकारी आदेशों या अध्यादेशों को शामिल नहीं किया जाता है।
- 3. संविधान की नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में शामिल किए गए किसी भी कानून को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्ण और आजीवन उन्मुक्ति प्राप्त है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'IR कोल्हो वाद (2007)' में दिए गए निर्णय के बावजूद संसद इस अनुसूची के माध्यम से मौलिक अधिकारों के उल्लंघन करने वाले कानूनों को न्यायिक पुनरावलोकन से बचा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के मूल पाठ में 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन अनुच्छेद 13 (मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाले कानून शून्य होंगे), अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार), अनुच्छेद 136 (अपील के लिए विशेष अनुमति), और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता) जैसे अनुच्छेद अप्रत्यक्ष रूप से न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्रदान करते हैं।
कथन 2 गलत है: 'मूल संरचना का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) केवल संविधान संशोधनों तक ही सीमित नहीं है; न्यायपालिका ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि कार्यपालिका के प्रशासनिक कार्यों, नीतियों और विधायी अधिनियमों (Ordinary Legislation) की संवैधानिकता की जांच भी न्यायिक समीक्षा और मूल संरचना की कसौटी पर की जा सकती है।
कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने 'I.R. Coelh (2007)' के ऐतिहासिक मामले में यह स्पष्ट कर दिया था कि 24 अप्रैल 1973 (केशवानंद भारती निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में जोड़े गए सभी कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) और 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और उससे संबंधित विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम' के तहत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और तीव्र गति से निपटारा करना है।
2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित सख्त न्यायिक प्रक्रियाओं और नियमों से पूरी तरह बाध्य है, और इसे अपने समक्ष आने वाले मामलों की सुनवाई करते समय 'नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में की जा सकती है, क्योंकि इसके आदेशों को चुनौती देने के लिए देश के उच्च न्यायालयों (High Courts) के अपीलीय क्षेत्राधिकार को पूरी तरह से वर्जित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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कथनों पर विचार करें: 1. चिल्का झील एक लैगून है, 2. पुलीकट दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून है, 3. वुलर मीठे पानी की झील है। सही कूट चुनें?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के गठन, शक्तियों और उसके कामकाज के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उसे यह प्रतीत होता है कि एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना से लोक हितों की प्राप्ति होगी, तो वह इस परिषद की स्थापना कर सकता है और इसके गठन, कर्तव्यों तथा प्रक्रिया को परिभाषित कर सकता है।
2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1990 में पहली बार राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्य परिषद का गठन किया गया था, और प्रधानमंत्री इस परिषद के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं।
3. अंतर-राज्य परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसकी बैठकें संविधान के प्रावधानों के तहत वर्ष में अनिवार्य रूप से तीन बार आयोजित की जानी चाहिए, और इसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय राज्यों के लिए बाध्यकारी (Binding) होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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शारदा (काली) नदी मैदानी भाग में प्रवेश करने के बाद किस नदी में मिल जाती है?
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