त्वरित लिंक्स
UPTET
4 views
उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) और प्रमुख फसल पैटर्नों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश को योजना आयोग द्वारा कुल 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जहाँ विभिन्न प्रकार की मृदा जैसे जलोढ़ (Alluvial), लाल और भूरी तथा बिन्द क्षेत्र की हल्की मृदा पाई जाती है।
- 2. राज्य के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में मुख्य रूप से कैल्केरियस और क्षारीय मृदा की अधिकता पाई जाती है, जिसे स्थानीय रूप से 'रूहेलखंड' या 'रेह' (Reh) कहा जाता है, जो गन्ने और गेहूँ की खेती के लिए सर्वथा अनुपयुक्त होती है।
- 3. बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रमुख मृदा 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) हैं, जो चिकनी और काले रंग की होती हैं, तथा इनमें नमी धारण करने की अपूर्व क्षमता होती है, जिसके कारण बिना सिंचाई के भी रबी की फसलें (जैसे चना और मटर) उगाई जा सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि योजना आयोग (अब नीति आयोग) के अनुसार उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहाँ गंगा के मैदानी इलाकों से लेकर दक्षिण के पठारी (बुंदेलखंड) क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की मृदा पाई जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य हिस्सों में पाई जाने वाली 'रेह' या 'कल्लर' (Reh/Kallar) भूमि में क्षारीय तत्वों की अधिकता जरूर होती है, लेकिन उचित सुधार (जैसे जिप्सम का प्रयोग) और सिंचाई के बाद इस क्षेत्र में गन्ने और गेहूँ का उत्पादन बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है, अतः इसे 'सर्वथा अनुपयुक्त' कहना गलत है। कथन 3 बिल्कुल सही है क्योंकि बुंदेलखंड क्षेत्र की 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएं चिकनी और काली होती हैं, जिनमें जल धारण करने की क्षमता अत्यधिक होती है, जिससे वहाँ सूखा सहन करने वाली रबी फसलें जैसे चना, मटर और ज्वार बिना सिंचाई के भी सफलतापूर्वक उगाई जाती हैं।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास के परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित में से किस वर्ष में उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रान्त) की विधान परिषद (Legislative Council) का गठन पहली बार किया गया था और इसका प्रथम सत्र कहाँ आयोजित हुआ था?
→
उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि-जलवायु क्षेत्रों तथा प्रमुख फसलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएं चिकनी और अत्यधिक उपजाऊ होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की विशेष क्षमता होती है, जो चना और मटर जैसी रबी फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा राज्य को कुल 20 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की वर्षा, तापमान और मिट्टी की विविधता को स्पष्ट करते हैं।
3. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी मुख्य रूप से उपजाऊ कछारी और नम प्रकार की होती है, जहाँ धान और गन्ने की बंपर पैदावार होती है, लेकिन यह क्षेत्र बाजरे की खेती के लिए राज्य में सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा में बच्चों की पहचान और निदान' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (ASD) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS), 'सुपीरियर टेम्पोरल सुलस' (Superior Temporal Sulcus), और 'फ्युसिफॉर्म फेस एरिया' (Fusiform Face Area - FFA) के बीच सामाजिक-संज्ञानात्मक प्रसंस्करण विफलता, चेहरे की पहचान के क्षरण, और थ्योरी ऑफ़ माइंड (Theory of Mind - ToM) की कमी की सक्रियण गतिकी, तथा साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) के 'एम्पैथाइजिंग-सिस्टमेटाइजिंग (E-S) सिद्धांत' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-ऑटिज्म ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Autism Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में दृश्य अनुसूचियों (Visual Schedules), सामाजिक कहानियों (Social Stories) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, भू-गर्भिक संरचना और खनिज संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश का दक्षिणी पठारी क्षेत्र (जिसे बुंदेलखंड पठार भी कहा जाता है) प्रायद्वीपीय भारत के पठार का ही उत्तरी विस्तार है, जहाँ प्राचीन रवेदार चट्टानों (Archean Rocks) में ग्रेनाइट, गनीस और संगमरमर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
2. राज्य के सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में चूना पत्थर (Limestone), कोयला (Non-coking coal) और डोलोमाइट के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश का कांच बालू (Glass Sand) उत्पादन में देश में अग्रणी स्थान है।
3. तराई और भाभर क्षेत्रों में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा को स्थानीय रूप से 'खादर' कहा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है, और यह क्षेत्र बॉक्साइट तथा यूरेनियम के खनन के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनकी प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके भौतिक गुणों के आधार पर क्रमबद्ध करना (Seriation), उनका वर्गीकरण करना (Classification) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता को भली-भांति सीख जाते हैं।
3. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage, 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) की क्षमता का पूर्ण विकास होता है, जिससे वे तार्किक रूप से समस्याओं के विभिन्न समाधानों की कल्पना कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.