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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, मीमांसा (पूर्व मीमांसा) दर्शन और उसके प्रणेता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पूर्व मीमांसा दर्शन के संस्थापक महर्षि जैमिनी हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य वेदों के कर्मकांडीय हिस्से (ब्राह्मण ग्रंथों) की व्याख्या करना और वैदिक यज्ञों व अनुष्ठानों की अनिवार्यता को स्थापित करना है।
  2. 2. इस दर्शन के अनुसार, धर्म ही वह सर्वोच्च नियम है जो मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है, और वेदों को 'अपौरुषेय' (किसी पुरुष या देवता द्वारा रचित नहीं बल्कि शाश्वत) माना गया है।
  3. 3. उत्तर मीमांसा (वेदांत दर्शन), जिसे बादरायण द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र पर आधारित माना जाता है, पूर्व मीमांसा के बिल्कुल विपरीत केवल ज्ञान मार्ग पर बल देती है, जबकि पूर्व मीमांसा कर्म मार्ग पर जोर देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. पूर्व मीमांसा दर्शन के प्रवर्तक महर्षि जैमिनी हैं, जिन्होंने 'मीमांसा सूत्र' की रचना की और इसका मुख्य उद्देश्य वेदों के कर्मकांडीय भाग का विश्लेषण करना है। 2. मीमांसा दर्शन वेदों को अपौरुषेय मानता है और धर्म (कर्तव्य) को सर्वोच्च मानता है। 3. पूर्व मीमांसा को 'कर्म-मीमांसा' और उत्तर मीमांसा (वेदांत) को 'ब्रह्म-मीमांसा' कहा जाता है, जहाँ पूर्व मीमांसा कर्म पर और उत्तर मीमांसा ज्ञान/ब्रह्म पर बल देती है।
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