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Indian Polity
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अनुच्छेद 343 क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
संघ की राजभाषा।
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चार्टर अधिनियम, 1853 (Charter Act of 1853) के प्रावधानों और ब्रिटिश कालीन संवैधानिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों को पृथक् किया गया तथा विधायी कार्यों के लिए 'केंद्रीय विधान परिषद' (Central Legislative Council) के रूप में एक अलग 12 सदस्यीय मिनी-संसद की स्थापना की गई।
2. सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली का आरंभ किया गया, जिसके तहत वर्ष 1854 में 'मैकाले समिति' (Macaulay Committee) की नियुक्ति की गई, और यह व्यवस्था भारतीयों के लिए भी खोल दी गई।
3. इस अधिनियम के द्वारा बंगाल के लिए एक पृथक् लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति की गई ताकि गवर्नर-जनरल को बंगाल के प्रत्यक्ष प्रशासनिक भार से मुक्त किया जा सके, जिससे वह पूरे भारत के प्रशासन पर अधिक प्रभावी नियंत्रण रख सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights - Article 12-35) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति प्रदान करता है और यह घोषित करता है कि मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पजीवीकरण करने वाले सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी, जिसके अंतर्गत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानून ही नहीं बल्कि अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ियाँ या प्रथाएँ भी शामिल हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता इस मामले में उच्चतम न्यायालय से अधिक विस्तृत है।
3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित या निराकृत कर सके ताकि उनके कर्तव्यों का समुचित निर्वहन और अनुशासन सुनिश्चित हो सके, और इस प्रकार की विधि बनाने की अनन्य शक्ति केवल राज्य के विधानमंडलों को प्राप्त है, संसद को नहीं।
4. आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा भी किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा सुनिश्चित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रकार का कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत जब किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन से संबंधित विधेयक राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजा जाता है, तो राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर दी गई राय या सिफारिश राष्ट्रपति और संसद दोनों के लिए सर्वथा बाध्यकारी (Binding) होती है।
3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा, अर्थात् इन्हें संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण अधिकार तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित ऐसा अध्यादेश उसी प्रकार का बल और प्रभाव रखता है जैसा कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम का होता है, किंतु इसके लिए राष्ट्रपति के निर्देशों की आवश्यकता कुछ विशेष मामलों (जैसे विधानमंडल में उसी विषय के विधेयक को प्रस्तुत करने पर रोक) में अनिवार्य होती है।
2. राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति स्वविवेकिए शक्ति नहीं है, बल्कि वह राज्य मंत्रिमंडल (जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है) की सलाह और सहायता से ही इस शक्ति का प्रयोग करता है, और यदि राज्यपाल का अध्यादेश राज्य विधानमंडल के पुनरारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
3. अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, किंतु झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों के लिए संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत जनजातीय कल्याण मंत्री का भारसाधक एक पृथক मंत्री नियुक्त किए जाने का संवैधानिक दायित्व राज्यपाल पर अनिवार्य रूप से आरोपित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान सभा में महिलाएं?
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