BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
7 views

प्राचीन भारतीय इतिहास के महाजनपद काल और उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में कुल 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से वर्तमान उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र में कुल 8 महाजनपद स्थित थे।
  2. 2. 'वत्स' महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, जो वर्तमान प्रयागराज के समीप यमुना नदी के किनारे स्थित थी और यह उस समय व्यापारिक मार्ग का एक प्रमुख केंद्र था।
  3. 3. 'चेदि' महाजनपद की राजधानी शुक्तिमती (सोथीनगर) थी, जिसका विस्तार वर्तमान उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा और हमीरपुर (बुंदेलखंड क्षेत्र) तक था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' तथा जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' के अनुसार कुल 16 महाजनपद थे। इनमें से 8 महाजनपद (कुरु, पांचाल, शूरसेन, वत्स, चेदि, काशी, कौशल और मल्ल) वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित थे, जो उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान और प्राचीन इतिहास दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी और चेदि महाजनपद का विस्तार आधुनिक बुंदेलखंड (बांदा, महोबा आदि) क्षेत्र में था जिसकी राजधानी शुक्तिमती थी।
Share:

Related Questions

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disability) के अंतर्गत, मनोवैज्ञानिक कर्ट गोल्डस्टीन (Kurt Goldstein) तथा बाद में ए.ए. स्ट्रॉस (A.A. Strauss) और लेहनेन (Lehtinen) द्वारा मस्तिष्क क्षति से ग्रसित बालकों के अध्ययन के दौरान किस विशिष्ट अधिगम विकार या लक्षण-समूह को रेखांकित किया गया था, जिसमें बालक पृष्ठभूमि (Background) और आकृति (Figure) में भेद करने में असमर्थ रहता है तथा जटिल उद्दीपनों से आसानी से विचलित हो जाता है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और उपचारात्मक शिक्षण' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिसकल्कुलिया' (Dyscalculia - गणितीय विकार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सर्कस' (Intraparietal Sulcus - IPS), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'सिनगुलेट कॉर्टेक्स' (Cingulate Cortex) के बीच संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक कार्यशील स्मृति (Spatial Working Memory), और अंकगणितीय तथ्य पुनर्प्राप्ति की सक्रियण गतिकी, तथा स्टैनिस्लास दहाएने (Stanislas Dehaene) के 'ट्रिपल कोड मॉडल' (Triple Code Model: विजुअल अरेबिक नंबर फॉर्म, वर्बल ऑडिट शब्द, और एनालॉग मेग्नीट्यूड रिप्रेजेंटेशन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिसकल्कुलिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Dyscalculia Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी संख्यात्मक हस्तक्षेप रणनीतियों, मूर्त-से-अमूर्त (Concrete-to-Abstract) अनुदेशन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? प्राथमिक स्तर पर गणितीय शिक्षण और 'वैन हीले के ज्यामितीय चिंतन के सिद्धांत' (Van Hiele's Theory of Geometric Thinking) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्तर 1 (विश्लेषण - Analysis): इस स्तर पर बच्चे ज्यामितीय आकृतियों को केवल उनके समग्र रूप या दिखावट के आधार पर पहचानने के बजाय, उनके भागों और गुणों (Properties) का विश्लेषण करने लगते हैं, जैसे यह समझना कि एक आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं। 2. स्तर 3 (औपचारिक निगमन - Formal Deduction): इस स्तर पर बालक ज्यामितीय प्रमेयों (Theorems) की औपचारिक रचना, अभिगृहीतों (Axioms) के प्रयोग और तार्किक साक्ष्यों के बीच अंतर को भली-भांति समझने लगता है, जो कि माध्यमिक स्तर की ज्यामिति का मुख्य आधार है। 3. वैन हीले के अनुसार, ज्यामितीय चिंतन के ये सभी स्तर क्रमिक (Sequential) और पदानुक्रमित (Hierarchical) हैं, जिसका अर्थ है कि एक छात्र उच्च स्तर (जैसे स्तर 4) पर तब तक नहीं पहुँच सकता जब तक वह पिछले सभी निम्न स्तरों को पार नहीं कर लेता। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के अंतर्दृष्टि सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मैक्स वर्दइमर, कुर्त कोफ्का और वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Köhler) द्वारा प्रतिपादित 'गेस्टाल्ट अधिगम' (Gestalt Learning) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'लैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Lateral Prefrontal Cortex), 'ेंट्रल टेम्पोरल लोब' (Ventral Temporal Lobe), और 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex) के बीच अचानक समस्या समाधान (Aha! Experience), संज्ञानात्मक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring), और 'मस्तिष्क के डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' तथा 'कार्यकारी नियंत्रण नेटवर्क' के बीच समन्वय की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन डीवी के 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-गेस्टाल्ट ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Gestalt Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में समग्रतावादी सूझ-बूझ, रचनात्मक अंतर्दृष्टि व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण तथा पारिस्थितिकी (Ecology) के अंतर्गत 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramids) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि पारिस्थितिक तंत्र में लिंडमैन (Lindeman) के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार ऊर्जा का प्रवाह एकपोषी स्तर से उच्च पोषी स्तर की ओर जाने पर हमेशा घटता जाता है तथा ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है। 2. जलीय पारिस्थितिक तंत्र (Aquatic Ecosystem) में 'बायोमास का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) सामान्यतः उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि यहाँ प्राथमिक उत्पादकों (फाइटोप्लांकटन) का कुल बायोमास उच्च पोषी स्तरों (जैसे ज़ूप्लांकटन और छोटी मछलियों) के बायोमास की तुलना में कम होता है। 3. 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Number) किसी वृक्षीय पारिस्थितिक तंत्र (Tree Ecosystem) में उल्टा बनता है, क्योंकि एक बड़े आकार के एकल वृक्ष (उत्पादक) पर आश्रित शाकाहारी पक्षियों की संख्या अधिक होती है और उन पर परजीवी के रूप में रहने वाले जीवों की संख्या और भी अधिक हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.