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प्राचीन भारतीय इतिहास एवं उत्तर प्रदेश के पुरातत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित 'सराय नाहर राय' और 'मदहा' नामक पुरास्थल मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) से संबंधित हैं, जहाँ से मानवरहित समाधियों और बूचड़खाने-सह-नृत्य क्षेत्र (Butchering areas) के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
  2. 2. उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में स्थित 'कोशाम्बी' पुरास्थल प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी थी, जिसकी पहचान का श्रेय पुरातत्वविद् ए. कनिंघम को जाता है, और यहाँ से मिले अशोक के स्तंभ लेख पर रानी कार्वाकी का उल्लेख मिलता है जिसे 'रानी का अभिलेख' भी कहा जाता है।
  3. 3. उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित 'लहुरादेवा' पुरास्थल से भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम कृषि साक्ष्य के रूप में चावल (धान) के प्रमाण मिले हैं, जिसकी प्राचीनता लगभग 7000 ईसा पूर्व से 8000 ईसा पूर्व के मध्य आंकी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 'सराय नाहर राय' और 'मदहा' से **मानवयुक्त (Human burials)** समाधियाँ मिली हैं, न कि मानवरहित। इसके अलावा यहाँ से हड्डियों के उपकरण, चूल्हे और समाधान के साक्ष्य मिले हैं। कथन 2 बिल्कुल सही है; कौशाम्बी वत्स महाजनपद की राजधानी थी और यहीं से प्रयाग प्रशस्ति तथा रानी का अभिलेख (अशोक स्तंभ पर) से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य मिले हैं। कथन 3 भी सही है; नवीनतम पुरातात्विक उत्खनन और कार्बन डेटिंग के आधार पर 'लहुरादेवा' (संत कबीर नगर) को भारतीय उपमहाद्वीप में चावल (धान) का प्राचीनतम साक्ष्य स्थल माना जाता है, जिससे मेहरगढ़ और कोल्हवा की प्राचीनता की अवधारणा में संशोधन हुआ है। अतः विकल्प (b) सही है।
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