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Indian Polity
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राज्य में 'संवैधानिक तंत्र की विफलता' पर राष्ट्रपति शासन किस अनुच्छेद में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 356 संवैधानिक विफलता पर है।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (भाग IX) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा प्रत्येक राज्य में पंचायतों के लिए तीन-स्तरीय (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) संरचना अनिवार्य की गई है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने से छूट दी गई है।
2. पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरी जाने वाली कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल सामान्य सीटों तक ही सीमित है और इसे पंचायतों के अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर लागू नहीं किया जा सकता है।
3. अधिनियम के अनुच्छेद 243-G के अनुसार, राज्य का विधानमंडल पंचायतों को ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन से संबंधित हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल—विधानसभा और विधान परिषद—की संरचना, गठन और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने उस राज्य के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित कर दिया हो, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का गठन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय स्थिति भिन्न थी)।
3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन और मनोनयन के संबंध में, इसके कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष पूर्व ग्रेजुएट हो चुके हैं, तथा 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, स्रोतों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयरिश संविधान (जिसने स्वयं इन्हें स्पेनिश संविधान से लिया था) से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में शामिल किए गए नीति निर्देशक तत्व न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, किंतु संविधान का अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और देश के लिए कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए सिद्धांतों को जोड़ा गया, जिनमें समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A), तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) और उसके पश्चात के कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि मूल अधिकार (Fundamental Rights) और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं, और यदि संसद अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को सीमित करते हुए कोई कानून बनाती है, तो उसे केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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नीति आयोग कब बना?
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समान कार्य-समान वेतन?
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