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उत्तर प्रदेश की कृषि और मृदा प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश में 'अम्लीय' और 'क्षारीय' दोनों प्रकार की मृदा सुधार की समस्या पाई जाती है, जिसमें क्षारीय या उसर (Usar) भूमि के सुधार के लिए मुख्य रूप से 'जिप्सम' (Gypsum) का प्रयोग किया जाता है, जो भूमि के कैल्सियम को प्रतिस्थापित कर सोडियम की मात्रा को संतुलित करता है।
- 2. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की प्रचुरता होती है, जबकि पोटाश और ह्यूमस की भारी कमी पाई जाती है, जिसके कारण यह क्षेत्र केवल धान की खेती के लिए ही उपयुक्त है, गेहूँ के लिए बिल्कुल नहीं।
- 3. राज्य में कृषि विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुल 4 (चार) कृषि-पारिस्थितिकीय क्षेत्रों (Agro-ecological Zones) का निर्धारण किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश की क्षारीय (उसर या कलर) भूमि के सुधार के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिप्सम ($CaSO_4 \cdot 2H_2O$) के प्रयोग की संस्तुति की जाती है, जो मृदा में मौजूद सोडियम कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट को कैल्सियम से प्रतिस्थापित करके उसकी क्षारकता को कम करता है। कथन 2 गलत है: तराई क्षेत्र की मिट्टी में नाइट्रोजन और ह्यूमस (जैविक पदार्थ) की पर्याप्त मात्रा या अधिकता होती है, न कि पोटाश और ह्यूमस की कमी; यहाँ धान और गन्ने की बंपर पैदावार होती है। कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture) के अनुसार, उत्तर प्रदेश को कुल 20 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (या भारत के संदर्भ में यूपी को 3 बड़े कृषि-पारिस्थितिकीय क्षेत्रों) में विभाजित किया गया है, न कि 4 में (कृषि-जलवायु क्षेत्र 9 हैं)। अतः केवल कथन 1 सही है।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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