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UPTET
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, भौगोलिक और खनिज संसाधनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला एकमात्र ऐसा जिला है जिसकी सीमाएं चार राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार) से मिलती हैं, और यह जिला अपने प्रचुर खनिज भंडारों (जैसे चूना पत्थर, कोयला और डोलोमाइट) के लिए जाना जाता है।
- 2. उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में तांबा (Copper), यूरेनियम और रॉक फॉस्फेट जैसे खनिज प्रमुख रूप से पाए जाते हैं, और यह जिला मध्य प्रदेश से तीन तरफ से घिरा हुआ है।
- 3. उत्तर प्रदेश राज्य में देश के कुल कोयला भंडार का लगभग 10% हिस्सा पाया जाता है, जिसके कारण सोनभद्र और चंदौली जिलों में बड़े पैमाने पर कोयला आधारित ताप विद्युत गृह (Thermal Power Plants) स्थापित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला भारत का एकमात्र ऐसा जिला है जो चार राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार) को स्पर्श करता है। यह जिला चूना पत्थर, कोयला, डोलोमाइट और पाइराइट्स जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध है। कथन 2 सही है: ललितपुर जिला उत्तर प्रदेश में यूरेनियम, तांबा (सोनराई क्षेत्र) और रॉक फॉस्फेट के एकमात्र प्रमुख उत्पादक के रूप में जाना जाता है, और यह मध्य प्रदेश से तीन तरफ से घिरा हुआ है। कथन 3 गलत है: उत्तर प्रदेश में देश के कुल कोयला भंडार का बहुत ही नगण्य (एक प्रतिशत से भी कम) हिस्सा पाया जाता है, और राज्य में कोयले का उत्पादन मुख्य रूप से केवल सोनभद्र (सिंगरौली क्षेत्र) तक ही सीमित है; देश के कुल कोयला भंडार का अधिकांश भाग झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में केंद्रित है। अतः विकल्प (a) सही है।
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उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता के इतिहास के संदर्भ में, वर्ष 1848 में आगरा से प्रकाशित होने वाले राज्य के पहले हिंदी समाचार पत्र 'बनारस अखबार' (यद्यपि प्रकाशन स्थल बनारस से भी जुड़ा रहा) या उस काल के अन्य समाचार पत्रों के परिप्रेक्ष्य में, राजा शिवप्रसाद 'सितारे हिंद' द्वारा संपादित 'बनारस अखबार' की भाषा और लिपि की मुख्य विशेषता क्या थी, जिसने उस समय के भाषाई विवाद को जन्म दिया था?
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बच्चों में नैतिक विकास के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) अवस्था के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सी प्रमुख विशेषताएँ सम्मिलित हैं?
1. इस स्तर पर व्यक्ति के नैतिक निर्णय बाहरी सामाजिक नियमों या अधिकार से स्वतंत्र होते हैं, और व्यक्ति अपने स्वयं के विवेक तथा सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्धारण करता है।
2. इस चरण के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) अवस्था में व्यक्ति यह समझता है कि कानून सामाजिक भलाई के लिए बनाए गए हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों का हनन करता है, तो उसमें परिवर्तन किया जा सकता है।
3. इस स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation) है, जहाँ व्यक्ति किसी बाहरी सजा या प्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि अपने आंतरिक अंतरात्मा (Conscience) और न्याय, मानवाधिकार तथा समानता के सार्वभौमिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) के दूसरे चरण यानी 'व्यक्तिवाद और विनिमय' (Individualism and Exchange) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से पुरस्कार प्राप्त करने और दंड से बचने की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर आधारित होता है, जिसे 'जैसी करनी वैसी भरनी' की भावना भी कहते हैं।
2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Interpersonal Relationships) अभिविन्यास में व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य दूसरों की नज़रों में aprobación (स्वीकृति) प्राप्त करना और सामाजिक रूप से स्वीकृत अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करना होता है।
3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम और उच्चतम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों की परवाह किए बिना अपने स्वयं के विवेक और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे कानून समाज के नियमों के विरुद्ध क्यों न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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