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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में 'नियोजित विकास का सिद्धांत' (Principle of Predictable Direction) और उसके स्वरूप के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस सिद्धांत के अंतर्गत विकास की दिशा सामान्यतः सिर से पैर की ओर ('मस्तकोधोमुखी' या Cephalocaudal) तथा शरीर के केंद्रीय भाग से दूरस्थ अंगों की ओर ('निकूरस्थ' या Proximodistal) होती है।
  2. 2. विकास की दर सभी बालकों में एक समान और रैखिक (Linear) गति से चलती है, अर्थात आयु के हर पड़ाव पर शारीरिक और मानसिक विकास का प्रतिशत बिल्कुल एक जैसा होता है।
  3. 3. यद्यपि विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण भिन्न हो सकती है, तथापि विकास के चरण और प्रतिमान (Patterns) दुनिया भर के सभी बच्चों में सार्वभौमिक और पूर्वानुमानित (Predictable) होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि विकास की दिशा हमेशा 'मस्तकोधोमुखी' (सिर से पैर की ओर - Cephalocaudal) तथा 'निकूरस्थ' (केंद्र से बाहर की ओर - Proximodistal) होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि विकास की गति कभी भी रैखिक (Linear) या एक समान नहीं होती, बल्कि यह वर्तुलाकार (Spiral) गति में होती है और इसमें तीव्र व मंद होने की अवस्थाएँ आती हैं। कथन 3 सही है क्योंकि विकास के प्रतिमान सार्वभौमिक और पूर्वानुमानित होते हैं, भले ही व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण बालकों की विकास दर में अंतर पाया जाता हो। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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