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UPTET
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) तथा उसकी मुख्य विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया था।
- 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (Justice) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से लिया गया है, जिसके अंतर्गत सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का उल्लेख किया गया है, जिसमें राजनीतिक न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, और संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें मौलिक संशोधन कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन (1976) के द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे। कथन 2 गलत है: प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति से लिया गया है, किंतु इसमें किसी एक न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी गई है, बल्कि तीनों का समान महत्व है। कथन 3 गलत है: 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है; इसके बाद 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में न्यायालय ने अपने पूर्व के निर्णय को बदलते हुए प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना था।
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